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विहिप की मांग: धर्मांतरण पर रोक का कानून बने

Sun, 25 Jan 2015 01:11 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बालकृष्ण नाईक ने धर्मांतरण पर रोक का कानून बनाने की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि सीमांत प्रदेशों में ईसाई मिशनरियों व मुस्लिम संगठनों द्वारा सेवा की आड़ में धर्मांतरण कराया जा रहा है। सेवाकार्यों से ही इस कुचक्र रोका जा सकता है।

उन्होंने हिंदू संगठनों का आह्वान किया कि वनवासी, गिरिवासी, अभावग्रस्त एवं पिछड़ों को शिक्षित, संस्कारित व स्वावलंबी बनाने में योगदान देकर उनका भरोसा जीतें।
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नाईक शनिवार को यहां नौबस्ता स्थित रामलीला मैदान में विहिप की ओर से सेवा कार्य चला रहे संगठनों के सम्मेलन ‘सेवा कुंभ’ में बोल रहे थे।

नाईक ने कहा कि विहिप का धर्मांतरण पर विश्वास नहीं है। इसलिए वह कभी धर्मांतरण कराती भी नहीं, पर घर वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जा सकता है।
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'घर वापसी' पर नहीं होनी चाहिए रोक

सैकड़ों साल पहले किसी मजबूरी में धर्मांतरण करने वाले अगर पहले के निर्णय को सुधारना चाहते हैं, तो उस पर रोक नहीं होनी चाहिए।

राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री विनायक राव देश पांडेय ने कहा कि विहिप ने सेवा कार्य कर रहे लोगों को सम्मानित करने के लिए 20 सम्मेलन करने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों में विहिप कभी भेदभाव नहीं करती। जो लोग विहिप को मुसलमानों को दुश्मन बताते हैं, वे भ्रम फैलाते हैं। उन्होंने लखनऊ के कार्यक्रम में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी की सराहना की।

विहिप के राष्ट्रीय सह सेवा प्रमुख आनंद प्रकाश हरबोला, प्रांतीय सह सेवा प्रमुख वेद प्रकाश, प्रांत सेवा प्रमुख वीरेंद्र कुमार, कार्यक्रम के अध्यक्ष अवधेश कुमार, क्षेत्र संगठन मंत्री रास बिहारी, संयुक्त क्षेत्र सेवा प्रमुख राधेश्याम द्विवेदी ने भी विचार रखे।
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