... चारबाग में मोहन होटल के सामने नगर निगम की कीमती जमीन पर बिल्डिंग भी बनी है। हालांकि, करीब 20 हजार वर्गफीट की इस जमीन से नगर निगम को कोई आय नहीं हो रही है। वहीं, बिल्डिंग में कब्जे हैं। दस साल पहले यहां पीपीपी मॉडल पर होटल बनाने का प्रस्ताव बना, पर हुआ कुछ नहीं। इस जमीन की कीमत दस करोड़ रुपये से अधिक आंकी जाती है। वहीं, गोमतीनगर में नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला के सामने करीब 70 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। 150 करोड़ की इस जमीन पर दस साल से आवासीय योजना लाने की बात हो रही है। प्रस्ताव भी बन रहा, पर अब तक एक ईंट नहीं रखी जा सकी है।
महापौर संयुक्ता भाटिया का कहना है कि जमीनों को लेकर किसी से अनुबंध या व्यावसायिक उपयोग का अधिकार सीधे महापौर को नहीं है। इसे लेकर शासन की अनुमति जरूरी है। नगर निगम प्रस्ताव बनाकर पास कर सकता है, पर मंजूरी शासन ही देता है। पूर्व में तीन जमीनों के व्यावसायिक इस्तेमाल का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन वहां से अभी हरी झंडी नहीं मिली है। जैसे ही आदेश आएगा, आगे की कार्यवाही शुरू होगी।