हृदय रोगी रामशंकर को मधुमेह के साथ हृदयरोग भी है। उनकी कुछ दवाएं नियमित चल रही हैं। वे रसीद दिखाते हुए बताते हैं कि पहले उन्हें 10 दिन की दवा 783 रुपये में मिल जाती थी, लेकिन अब उन्हें 10 दिन की दवा के लिए 887 रुपये देने पड़ रहे हैं। कुछ ऐसी ही पीड़ा अन्य रोगियों की भी हैं।
कुछ दवाएं नियमित चलती हैं : तिवारी
लोहिया संस्थान के हृदय रोग विभागाध्यक्ष प्रो. भुवनचंद्र तिवारी कहते हैं कि मधुमेह से पीड़ित हृदय रोगियों की कुछ दवाएं नियमित चलती हैं। जो मरीज की स्थिति के अनुसार घटाई-बढ़ाई जाती है। हृदय रोगियों को किसी तरह की समस्या नहीं होने पर भी हर तीसरे माह चिकित्सक के संपर्क में रहना चाहिए। इससे उनकी स्थिति की निगरानी होती रहती है।
कमीशन नहीं बढ़ा, विवाद जरूर बढ़ा : रस्तोगी
केमिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता मयंक रस्तोगी कहते हैं कि दवाओं के नए बैच से दाम तो बढ़ गए, लेकिन कारोबारियों का कमीशन नहीं बढ़ा है। ऐसे में अभी तक जो मरीज 10 दिन की दवा करीब आठ सौ रुपये की ले जाता था अब उन्हें नौ सौ रुपया देना पड़ता है। ऐसे में अक्सर विवाद की स्थिति बनती है। मरीज को समझाना पड़ता है कि इसमें उनका कोई दोष नहीं है।