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पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की 280 बीघा जमीन हड़पने के मामले में भूमाफिया अशोक पाठक गिरफ्तार

Wed, 18 Mar 2020 03:56 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अशोक पाठक। - फोटो : amar ujala
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पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की 280 बीघा जमीन हड़पने के मामले में वजीरगंज पुलिस ने मंगलवार शाम भूमाफिया अशोक पाठक को गिरफ्तार कर लिया। विभूतिखंड के रोहतास प्लूमेरिया अपार्टमेंट निवासी पाठक गोमतीनगर थाना का हिस्ट्रीशीटर है। उस पर धोखाधड़ी के 11 केस दर्ज हैं। वह 15 हजार रुपये का इनामी भी था। उसके खिलाफ दर्ज कुछ मामलों की सीबीआई जांच भी चल रही है।

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विवेचक शिवबली पांडेय ने बताया कि वर्ष 2018 में आधुनिक सहकारी गृहनिर्माण समिति लिमिटेड के सचिव डालीगंज के वीरेंद्र प्रताप द्विवेदी ने अशोक पाठक समेत आठ के खिलाफ केस किया था।

आरोप है कि कपिल प्रताप राना ने खुद को समिति का सचिव बताते हुए 17 मार्च 1997 को सरोजनीनगर के बिजनौर पिपरसंड स्थित जमीन का सौदा नई दिल्ली निवासी मेसर्स अंतरिक्ष लैंडमार्क कंपनी के निदेशक अभिषेक गोयल और अशोक पाठक से कर दिया। इस मामले में चौक निवासी मुतव्वली खुर्शीद आगा, जहीर आगा, इकबाल बेग, अभिषेेक गोयल, सुखमन गिल और अर्चना हांडा भी शामिल थीं।

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22 साल पहले शुरू हुआ था जमीन हड़पने का खेल

पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की जमीन हड़पने का खेल 22 साल पहले शुरू हुआ था। विवेचक शिवबली पांडेय ने बताया कि आधुनिक सहकारी गृहनिर्माण समिति लिमिटेड की आड़ में जमीन हड़पने का खेल शुरू हुआ था। कपिल प्रताप राना ने चौक के कटरा अबू तराब खां निवासी व वक्फ मस्जिद एवं कब्रिस्तान बालाकगंज के मुतवल्ली खुर्शीद आगा के साथ मिलकर 17 मार्च 1997 को एक फर्जी असाइनमेंट डील कराई। उक्त डील में चौक के जहीर आगा और गोलागंज के बारूदखाना निवासी इकबाल बेग की फर्जी गवाही कराई गई। इसके बाद सरोजनीनगर के बिजनौर पिपरसंड स्थित जमीन को बिल्डर अभिषेक गोयल और अशोक पाठक को बेच दिया गया।

इस सौदे में नाका के पानदरीबा निवासी सुखमन गिल व एमजीएसएफ थमैया रोड लखनऊ कैंट में रहने वाली अर्चना हांडा को गवाह बनाया गया। वीरेंद्र का कहना है कि कपिल प्रताप राना आधुनिक गृह निर्माण समिति का सचिव है न ही उसे समिति के किसी भी कार्य के लिए अधिकृत किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस जमीन को बेचा गया वह कभी सहकारी गृह निर्माण समिति के स्वामित्व व कब्जे में नहीं रही। पुलिस के मुताबिक, कपिल और अन्य लोगों ने दस्तावेजों में जो फर्जीवाड़ा किया उसका खुलासा उपनिबंधक कार्यालय में दस्तावेजों की जांच में हुआ था। निबंधन विभाग ने उक्त फर्जीवाड़े की एफआईआर भी दर्ज कराई थी।
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