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एलयूः दूसरे के दस्तखत से ये कम्प्यूटर ऑपरेटर लेती रही वेतन, निलंबित

Tue, 23 Jan 2018 12:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : डेमो
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लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में तैनात महिला कम्प्यूटर ऑपरेटर द्वारा द्सरे के हस्ताक्षर से वेतन लिया जाता रहा। कुलपति प्रो.एसपी सिंह ने 19 जनवरी को विभाग का औचक निरीक्षण किया तो इस खेल का भंडाफोड़ हुआ।
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कुलसचिव प्रो.राजकुमार सिंह ने दिव्या अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इससे पहले हुए निरीक्षण के दौरान भी दिव्या अग्निहोत्री गैरहाजिर मिली थीं।

निलंबन के दौरान उन्हें कुलानुशासक कार्यालय से संबद्ध किया गया है। इस दौरान उन्हें जीवन निर्वहन भत्ता मिलता रहेगा। कुलसचिव के जारी पत्र केे अनुसार दिव्या पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर वर्ष 2000 से कार्यरत हैं। 
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कुलपति ने इससे पहले भी विभाग का निरीक्षण किया था। उस दौरान दिव्या गैरहाजिर मिली थीं। उस समय उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। 19 जनवरी को कुलपति और कुलसचिव ने एक साथ 15 विभागों का निरीक्षण किया था। इस दफा भी दिव्या गैरहाजिर थीं। पर, उपस्थिति पंजिका पर उनके हस्ताक्षर थे।
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कर्मचारी परिषद महामंत्री की हैं पत्नी

डेमो - फोटो : demo pic
कुलपति के निर्देश के बाद वे दोपहर को कुलपति कार्यालय में उपस्थित हुईं। कुलपति ने उनसे नमूने के हस्ताक्षर लिए। कुलसचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि रजिस्टर पर दिव्या अग्निहोत्री के बजाय कोई अन्य व्यक्ति हस्ताक्षर कर रहा है।

यह भयंकर कदाचार है, इसलिए तत्काल प्रभाव से निलंबित करके उन्हें कुलानुशासक कार्यालय से संबद्ध किया जा रहा है। दिव्या लविवि कर्मचारी परिषद के महामंत्री संजय शुक्ला की पत्नी हैं।

इस वजह से भी उनका निलंबन चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पहले हुए निरीक्षण के दौरान भी यह मुद्दा उठा था। हालांकि संजय शुक्ला का कहना है कि उनकी पत्नी को उनके राजनीतिक रिश्तों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जबकि वे पूरी तरह से निर्दोष हैं। संजय पत्रकारिता विभाग में ही लाइब्रेरी सहायक पद पर कार्यरत हैं। दोनों ही पद गैर अनुमोदित और सेल्फ फाइनेंस हैं।

दिव्या अग्निहोत्री को निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर पाया गया। उस समय उपस्थिति पंजिका पर उनके हस्ताक्षर थे। उपस्थिति पंजिका पर उनकेे बजाय किसी और ने हस्ताक्षर किये थे। यह शिकायत बराबर मिलती रही है। इसलिए उन्हें निलंबित करके जांच की जा रही है। - प्रो.राजकुमार सिंह कुलसचिव, लविवि

उस दिन मेरी पत्नी फिजियोथेरेपी के लिए अनुमति लेकर फिजियोथेरेपी कराने गई थीं। रजिस्टर पर उनके ही हस्ताक्षर हैं। कुलपति जी हमारे मुखिया हैं वे कुछ भी कह सकते हैं। - संजय शुक्ला, महामंत्री, लविवि कर्मचारी परिषद
 
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