लोकसभा चुनाव के दौरान किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन का काम लेखपालों से करवाया गया, लेकिन इस के लिए केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत मानदेय नहीं दिया गया। सरकार के सामने यह मामला उठाए जाने के बाद राजस्व परिषद ने जिलाधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।
केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव के दौरान किसान सम्मान निधि योजना का एलान किया था। इसके तहत मिलने वाले 6000 वार्षिक में से 2000 रुपये की पहली किस्त का भुगतान चुनाव आचार संहिता लागू होने के पहले किया जाना था।
सरकार से लेकर जिले तक के अफ सरों ने कृषि विभाग के जरिये संचालित इस काम को तेजी से पूरा करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग के लेखपालों पर डाली। मुख्य सचिव से कलेक्टर तक इस योजना के क्रियान्वयन में प्रतिष्ठा लगाते नजर आए। नतीजा यह हुआ कि योजना में प्रदेश की सबसे अच्छी उपलब्धि रही।
करीब एक करोड़ किसानों को निधि की पहली किस्त का भुगतान शुरुआती दिनों में ही कर दिया गया। चुनाव में मतदाताओं के बीच इस योजना का क्रियान्वयन सर्वाधिक चर्चा में रहा। लेकिन, प्रदेश के अफसर केंद्र की ओर से योजना के क्रियान्वयन से जुड़े कार्मिकों के लिए तय किए गए इंसेंटिव को दबा गए।
लेखपाल संघ की शिकायत पर राजस्व विभाग ने राजस्व परिषद से रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद राजस्व परिषद ने समस्त जिलाधिकारियों से पूछा है कि क्या योजना का काम लेखपालों से कराया गया है? क्या इस कार्य के लिए संबंधित लेखपालों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है?
जिलाधिकारियों ने काम कराने और किसी तरह का भुगतान न किए जाने की रिपोर्ट भेजनी शुरू कर दी है। परिषद से सभी 75 जिलों की रिपोर्ट संकलित कर शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद इस संबंध में निर्णय की संभावना है।