विधानसभा की 11 सीटों के उपचुनाव में सबसे ज्यादा आठ सीटें जीतने के बावजूद भाजपा के रणनीतिकार संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने जमीनी हकीकत का आकलन करने का फैसला किया है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और महामंत्री संगठन सुनील बंसल उपचुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद ही अपने स्तर से उन कारणों को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी वजह से मतदान का प्रतिशत कम रहा। दिवाली बाद इन सीटों के लिए तय किए गए प्रभारी पदाधिकारियों और मंत्रियों से बातचीत करके उन वजहों को समझने की कोशिश होगी, जिनके चलते मतदान का प्रतिशत भी कम रहा और भाजपा के हाथ से एक सीट निकल गई।
सूत्रों के अनुसार, रणनीतिकारों की असली चिंता इन चुनाव में हाथ से एक सीट निकल जाना नहीं बल्कि आगे होने वाले चुनाव हैं। अगले साल न सिर्फ विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव होने हैं बल्कि पंचायतों के चुनाव भी प्रस्तावित हैं। जिनमें भाजपा के लिए स्थानीय स्तर पर समीकरण ज्यादा जटिल माने जाते हैं।
ऐसे में यदि जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं से कहीं कोई लापरवाही हुई तो पार्टी की स्नातक व शिक्षक तथा पंचायत चुनाव में भी परचम फहराने का लक्ष्य कठिन हो जाएगा। इसीलिए रणनीतिकार इन चुनावों का बिगुल बजने से पहले ही जमीन पर काम करने वाली सेना को नए सिरे से तैयार कर लेना चाहते हैं। साथ ही उन खामियों को दूर कर लेना चाहते हैं, जिनके कारण कुछ सीटों पर काफी कम अंतर से जीत दूर रह गई।