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किचन में काम करने से खराब हो सकता है ये अंग

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रसोई में अधिक समय काम करना किडनी को निष्क्रिय बना सकता है। इन खतरों की ओर इशारा कर रहा है, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजिकल रिसर्च (आईआईटीआर) का हाल ही में लखनऊ के 200 रसोइयों पर किया गया सर्वे।
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शहर के होटलों और रेस्त्रां में काम करने वाले इन रसोइयों को दो समूहों में बांट कर अध्ययन किया गया। इंडोर एयर क्वालिटी को लेकर आईआईटीआर पहले भी सर्वे में चिंता जता चुका है।

अध्ययन में रसोइए इसलिए शामिल किए गए, क्योंकि वे कई घंटे किचन में काम करते हैं। घरों के किचन को भी इससे बहुत अलग नहीं माना जा सकता, जहां महिलाएं दिन का अधिकतर समय गुजारती हैं। आईआईटीआर का दावा है कि यह अपनी तरह का पहला रिसर्च है।
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अध्ययन में सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य

अध्ययन के दौरान किचन में गैस स्टोव, खिड़कियों और फ्राइंग एरिया के आसपास मौजूद वातावरण से सैंपल लिए गए। दूसरी ओर अन्य कक्षों में वर्किंग डेस्क और गतिविधियों वाली जगह से सैंपल लिए गए। वहीं अध्ययन में शामिल सभी के यूरीन का भी विश्लेषण किया गया।

ये पहुंचा रहे नुकसान

•30 डिग्री तक पहुंचा रसोई का तापमान
•71.9 माइक्रॉन क्यूबिक मीटर था पीएम लेवल
•2.5 माइक्रॉन आकार वाले तत्व भी रसोई में 81.3 के स्तर पर थे
•3.1 से 17.71 तक पाया गया पीएएच लेवल

ऐसे करें अपना बचाव

किचन में सही वेंटीलेशन होना चाहिए। ताकि वातावरण से हानिकारक तत्व बाहर हो सकें। दूसरी ओर पानी अधिक पीने की सलाह रिपोर्ट में दी गई है।

पानी किचन में काम करने वालों के शरीर को हाइड्रेटेड रखकर उनकी किडनी को नुकसान पहुंचाने से बचाता है। इसी तरह तापमान को कम रखने के लिए भी सही वेंटीलेशन जरूरी है।
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इस तरह बीमार बना रही है आपको आपकी किचन

किचन में पीएएच पाया गया। इनमें नेप्थालीन, फ्लोरीन, एसनाफिथीन, फेनाथिरीन, पायरीन, क्रिसीन और इंडेनो पायरीन जैसे तत्वों की मौजूदगी पाई गई। ये सभी सुरक्षित मानक सीमा से अधिक पाए गए।

पाया गया कि लगातार गर्मी भरे माहौल में रहने और पीएएच के अधिक मात्रा में होने की वजह से किडनी पर असर पड़ रहा था। यह लंबे समय के दौरान उनकी किडनी को बेकार कर सकता है।

आईआईटीआर का शहर के 200 रसोइयों पर रिसर्च
वैज्ञानिकों की टीम ने होटलों व रेस्त्रां की रसोई में काम करने वाले व सपोर्ट स्टाफ को 94-94 के समूह में बांटा। पहला समूह खाना रसोई में तो दूसरे ग्रुप को अन्य कामों में लगाया गया।

इसे नियंत्रित क्षेत्र के तौर पर देखा गया। इस दौरान रसोई घरों में पैदा हो रही गर्मी, आर्द्रता, पार्टिक्यूलेट मैटर (पीएम), टोटल वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड (टीवीओसी) और पॉलिसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन्स (पीएएच) के रसोइयों की किडनी पर प्रभाव को जांचा गया।
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