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उपलब्धिः किडनी के मरीज को मिला नया जीवनदान

Tue, 23 Feb 2016 01:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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केजीएमयू के डॉक्टरों ने किडनी से 12 सेंटीमीटर का ट्यूमर निकालकर न सिर्फ मरीज की जान बचाई बल्कि यूनिवर्सिटी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। बीते बुधवार को यूरोलॉजी विभाग के डॉ. विश्वजीत और डॉ. राहुल जनक सिन्हा ने सर्जरी कर मरीज को एक नया जीवन दिया है।
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गोंडा निवासी बशीर अहमद (60) काफी दिनों से बीमार थे। जांच में पता चला कि किडनी में ट्यूमर है, उसने किडनी को पूरी तरह से घेर रखा है। इसके चलते कैंसर उनके हाथ तक फैल गया था। गोंडा से लखनऊ तक कई यूरोलॉजिस्ट को परिवारीजनों ने दिखाया, पर कोई फायदा नहीं हुआ।

हताश घरवाले बशीर अहमद को केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग लाए। यहां डॉ. विश्वजीत और डॉ. राहुल जनक सिन्हा ने पुरानी रिपोर्ट देखकर कुछ नई जांचें कराने के बाद ऑपरेशन के लिए हां कर दी।
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परिवारीजनों ने बताया कि बशीर अहमद की बीते छह माह में सेहत आधी हो गई थी। भूख नहीं लगती थी। शरीर का वजन भी तेजी कम हो रहा था। इसी बीच हल्की सी चोट से उनके दाएं हाथ की हड्डी टूट गई। पेशाब में दिक्कत होने लगी। इलाज शुरू कराया तो पता चला कि किडनी में ट्यूमर है।

यही नहीं ट्यूमर से फैलता हुआ कैंसर हाथ तक पहुंच गया। गोंडा से लेकर लखनऊ तक कई यूरोलॉजिस्ट को दिखाया पर कोई फायदा नहीं हुआ। ट्यूमर के फैलाव को देखते हुए कई सर्जनों ने सर्जरी से मना कर दिया।
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1 घंटे के अंदर ही किडनी को ट्यूमर सहित निकाला बाहर

हताश और परेशान होकर बशीर अहमद को केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में डॉ. विश्वजीत सिंह और डॉ. राहुल जनक सिन्हा की ओपीडी में लाए। परिजनों ने बताया कि डॉक्टरों ने पुरानी जांच रिपोर्ट से संतुष्ट होने के बाद ऑपरेशन करने पर सहमति जतायी।

डॉ. राहुल ने बताया कि ऑपरेशन का नाम सुनते ही बशीर के परिवारीजन लौट गए। इसके बाद लगभग डेढ़ महीने तक उनका कुछ पता नहीं चला। फिर एक दिन अचानक लौटे और ऑपरेशन कराने के लिए तैयार हो गए।

रीनल एंजियो एंबोलाइजेशन तकनीक के कारण बशीर के ट्यूमर को निकालने में काफी मदद मिली। ये सुविधा हाल ही में केजीएमयू में रेडियोडायग्नोसिस विभाग में शुरू हुई है। विभाग के डॉ. मनोज कुमार के साथ डॉ. विश्वजीत और डॉ. राहुल जनक सिन्हा ने बशीर के केस की चर्चा की।

डॉ. मनोज ने मरीज के ट्यूमर को खून की आपूर्ति करने वाली धमनी को ब्लॉक करने की जिम्मेदारी ले ली। उन्होंने रीनल एंजियो एंबोलाइजेशन टेक्निक की मदद से धमनी को ब्लॉक कर दिया। इस तकनीक ये फायदा हुआ कि ट्यूमर को खून की आपूर्ति रुक गई।

24 घंटे बाद जब ऑपरेशन के लिए पेट खोला गया तो पाया गया कि ट्यूमर 12 सेंटीमीटर से छह सेंटीमीटर का रह गया। इससे मात्र एक घंटे के अंदर ही किडनी को ट्यूमर सहित बाहर निकाल दिया गया। भविष्य में इस तकनीक से अब लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से ट्यूमर को बाहर निकाला जा सकेगा।
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केजीएमयू के इतिहास में यह पहला केस

डॉ. राहुल जनक ने बताया कि केजीएमयू के इतिहास में यह पहला केस है, जिसमें यूरोलॉजी और रेडियोडायग्नोसिस विभाग के चिकित्सकों ने मिलकर ट्यूमर को निकाला है। रीनल एंजियो एंबोलाइजेशन तकनीक से अब ऐसे ट्यूमर निकालने के लिए ओपन सर्जरी नहीं करनी पड़ेगी।

ट्यूमर का आकार छोटाकर उसे लैप्रोस्कोप से ही निकाल दिया जाएगा। इस केस पर एक छात्र को थिसिस तैयार करने के लिए कहा गया है। ऑपरेशन से पहले एमआरआई में पता चला कि 12 सेंटीमीटर के ट्यूमर ने किडनी को चारों तरफ से घेरा है।

17 फरवरी को ऑपरेशन की तारीख दी गई। इससे 24 घंटे पहले डीएसए तकनीक से ट्यूमर को खून की आपूर्ति करने वाली धमनी को ब्लॉक कर दिया था। ट्यूमर की बॉयोप्सी रिपोर्ट आने के बाद उसके शरीर में फैले कैंसर का इलाज किया जाएगा।

डॉ. राहुल जनक सिन्हा ने बताया कि लगभग डेढ़ माह पहले बशीर को फिर से भर्ती किया गया। ऑपरेशन से पहले उसकी फिटनेस की जांच करायी गई। हाथ के फ्रैक्चर को ठीक कराने के लिए आर्थोपैडिक विभाग की मदद ली गई। तीन चार महीने से ट्यूमर की चपेट में रहने के बशीर का स्वास्थ्य बहुत गिर गया था। हीमोग्लोबिन आठ ग्राम पहुंच गया था।

ऑपरेशन करने वाले ये डॉक्टर डॉ. विश्वजीत सिंह,डॉ. राहुल जनक सिन्हा, एनेस्थेटिस्ट,डॉ. गौतम, डॉ. वेद भास्कर,डॉ. सरिता सिंह, डॉ. मधु सूदन, डॉ. सीताराम, नर्स पूनम बधाई के पात्र है।
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