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खुद के अपहरण की साजिश में साथियों के हाथों मारा गया युवक

Thu, 28 Apr 2016 01:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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पेड़ से लटकी म‌िली थी लाश - फोटो : amar ujala
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राजधानी के मलिहाबाद इलाके में हत्या करके बाग में फंदे से लटकाया गया शव उन्नाव से एक करोड़ की फिरौती के लिए अपहृत विनोद कुमार का था। दिल्ली में केले के आढ़ती बड़े भाई से रकम ऐंठने के इरादे से साले व दोस्तों की मदद से खुद के अपहरण की साजिश रची थी और एक करोड़ की फिरौती मांगी थी। परिवारीजनों ने बुधवार को शव की शिनाख्त की।
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इसके साथ हरकत में आई पुलिस ने उसके साले समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया है। आईजी जोन ने अपहरण व हत्याकांड का जल्द खुलासे का दावा किया है।

इंस्पेक्टर मलिहाबाद उमाशंकर उत्तम ने बताया कि गांव यादव खेड़ा में डींगुर पाल की बाग में मंगलवार सुबह आम के पेड़ से लटके मिले शव की शिनाख्त उन्नाव के औरास थाने के गांव हाजीपुर गोसा निवासी विनोद कुमार के रूप में हुई है।

विनोद चार अप्रैल से लापता था और आठ अप्रैल को बदमाशों ने परिवारीजनों को कॉल करके एक करोड़ की फिरौती मांगी थी। विनोद के पिता रामसेवक की दिल्ली में केले की आढ़त है। बड़ा भाई आजाद केले का व्यवसाय संभालता था और चार छोटे भाई मनोज, सरोज, शिवपाल व विनोद उसे सहयोग करते थे।
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50 लाख फिरौती लेकर बुलाया था दुबग्गा

अपहरण की सूचना पर दिल्ली से आए आजाद ने विभिन्न स्थानों पर तलाश के साथ औरास थाने में सूचना दी और 15 अप्रैल को फिरौती के लिए अपहरण का केस दर्ज किया गया था। औरास पुलिस उसके भाई को विश्वास में लेकर बदमाशों को पकड़ने का तानाबाना बुन रही थी।

आजाद ने एक करोड़ देने में असमर्थता जताई तो बदमाशों ने 23 अप्रैल को उसे 50 लाख लेकर लखनऊ के आलमनगर और उसके बाद दुबग्गा बुलाया। वहां से लौटते समय उन्नाव के ही हसनगंज इलाके में सड़क हादसे में आजाद की मौत हो गई और उसका साथी रामखिलावन घायल हो गया था।

इसी के बाद विनोद के साथी खेल बिगड़ने के डर से घबरा गए और विनोद का मार डाला। मलिहाबाद में शव मिलने की सूचना पर विनोद के परिवारीजन बुधवार सुबह मलिहाबाद थाने पहुंचे। फोटो पहचानी और मॉर्च्युरी पहुंचकर शव की शिनाख्त की।

हरकत में आई पुलिस
विनोद की हत्या के बाद हरकत में आई उन्नाव पुलिस ने मलिहाबाद के रहीमाबाद इलाके में रहने वाले उसके साले समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया। इनमें कस्बा रहीमाबाद में मोबाइल शॉप का मालिक वसीम भी शामिल है।

बुरी सोहबत के कारण हो गया था तंगहाल

आईजी जोन ए सतीश गणेश ने बताया कि पता चला है कि विनोद शराब पीता था और बुरी सोहबत में पड़ गया था। इससे वह तंगहाल रहता था, जबकि पिता व बड़े भाई व्यापार में अच्छी कमाई कर रहे थे।

मोटी रकम ऐंठने के इरादे से विनोद ने अपने साले के साथ मिलकर खुद के अपहरण की साजिश रची थी। साजिश में शामिल साले व साथियों की उसके परिवारीजनों की गतिविधियों पर नजर रहती थी।

उन्हें पता रहता था कि बड़ा भाई आजाद फिरौती की रकम के बजाय बैक में कुछ रुपये व रद्दी कागज रखकर निकला है और पुलिस कुछ दूरी बनाकर साथ चल रही है। सड़क हादसे में 23 अप्रैल की रात आजाद की मौत के बाद खेल बिगड़ते नजर आया।
साथियों को लगा कि पुलिस के हाथ लगने पर विनोद उन्हें फंसा देगा। रकम मिलने के कोई आसार नजर न आने पर साथियों ने हत्या करके उसका शव लटका दिया।

वहीं, कई दिन तक टरकाने और हत्या के बाद पुलिस के हरकत में आने के सवाल पर आईजी जोन ने कहा कि लापरवाही उजागर होने पर संबंधित पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस तरह खुलने लगे राज

आईजी जोन ने कहा कि साले पर पुलिस की नजर थी लेकिन वह भी सतर्क था। फिरौती की मांग व बातचीत में 20 नंबर इस्तेमाल हुए। बात खत्म होते ही मोबाइल बंद हो जाता था और उन नंबरों से किसी अन्य को कॉल नहीं की जा रही थी।

साले ने पूछताछ में राज उगलने शुरू किए। पता चला कि औरास थाने के मुसलावां निवासी वसीम का रहीमाबाद में पीसीओ था और अब उसी में मोबाइल शॉप है। वह नए मोबाइल व सिमकार्ड बेचने के साथ मोबाइल की रिपेयरिंग करता है।

मामले को टालने में ही लगी रही पुलिस
विनोद के चाचा वीरेंद्र कुमार ने बताया कि एक करोड़ की फिरौती की कॉल आने पर आजाद ने पूर्व प्रधान के साथ थाने जाकर कार्रवाई की मांग की। नतीजा न निकलने पर उसने 11 अप्रैल को वीरेंद्र को जानकारी दी। उनके साथ थाने गया।

पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कराने की सलाह दी। फिरौती की मांग होने पर भी गुमशुदगी लिखाने की सलाह पर वीरेंद्र व आजाद ने नाराजगी जताई और लौट गए। इलाकाई नेताओं के माध्यम से संपर्क किया। अपहरण के 11 दिन और फिरौती मांगे जाने के एक हफ्ते बाद 15 अप्रैल को रिपोर्ट लिखी गई।
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होशियारी करोगे तो टुकड़े-टुकड़े कर फेंक देंगे

पुलिस पर लापरवाही आरोप और वारदात में करीबी पर शक जता रहे वीरेंद्र कुमार ने कहा कि अपहरणकर्ताओं की हर गतिविधि पर नजर थी। 50 लाख की फिरौती पर बात तय होने पर पुलिस ने आजाद को किसी विश्वस्त के साथ अपहर्ताओं के बताए स्थान पर जाने की सलाह दी और सादे कपड़े में टीम पीछे चल रही थी।

अपहरणकर्ताओं ने शनिवार की शाम आलमनगर स्टेशन बुलाया। इसके बाद कॉल करके दुबग्गा पहुंचने को कहा। वहां इंतजार करने पर बोले कि पुलिस लेकर आए हो लौट जाओ।
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