जन्म के समय मां बाप को बच्चे के जननांग संबंधी विकृति का पता तुरंत चल जाता है। सामाजिक लोकलाज के फेर में वे इसे छिपाने लगते चाहिए कि समय के साथ ही यह विकृति हैं। उन्हें सोचना सभी को पता चल जाएगी। इसके बजाय अगर डॉक्टर का परामर्श लिया जाता तो बच्चा सामान्य जीवन व्यतीत करता।
प्रो. विश्वजीत सिंह ने बताया कि पहली प्राथमिकता कैंसर का उपचार करना है। इस मामले में मरीज का पालन-पोषण पुरुष के रूप में हुआ है। इसलिए सर्जरी करके उसे पूर्ण रूप से पुरुष बनाया जाएगा।
डॉक्टरों के अनुसार इस मामले में अगर घरवालों ने बच्चे के जन्म के बाद ही डॉक्टरों से संपर्क किया होता तो फिर आसानी से सर्जरी हो सकती थी। सर्जरी के माध्यम से घरवालों की इच्छा के अनुसार उसे पूर्ण बालक या बालिका बनाया जा सकता था। इसके बाद उसी हिसाब से उसका पालन-पोषण होता। सही समय पर सर्जरी न होने से रोगी ने इतने साल सामाजिक दंश झेला और इसी वजह से अब कैंसर पीड़ित भी हो गया।