अब पंचायत चुनाव में छह माह का समय बचा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आयोग को जिलों में जाकर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होती है। अगर आयोग ने इस काम के लिए आम तौर पर लगने वाले छह माह का समय लिया तो चुनाव में देरी की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। हालांकि, पंचायतीराज विभाग के एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने के आग्रह के साथ बताया कि समर्पित आयोग का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। अंतिम निर्णय वहीं से होना है। अब आयोग कितने समय में अपनी रिपोर्ट दे पाता है, ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया और चुनाव की तिथियां उसी पर निर्भर करेंगी।