प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग ही नहीं केजीएमयू के डॉक्टर भी प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त हैं। ये हालत तब है जब हाईकोर्ट और राजभवन ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपना रखा है।
यहां तक कि केजीएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. एसके अग्रवाल ने तो जिला प्रशासन के साथ मिलकर 75 डॉक्टरों का स्टिंग ऑपरेशन किया था। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटो के साथ सबूत सभी जगह उपलब्ध कराए थे।
इससे प्राइवेट प्रैक्टिस पर तो रोक नहीं लग सकी लेकिन कई चिकित्सकों ने केजीएमयू को ही छोड़ दिया। वहीं कई वीआरएस लेकर दोबारा संविदा पर केजीएमयू में नौकरी और प्राइवेट प्रैक्टिस दोनों में जुटे हैं।
केजीएमयू के चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने के मोह को कोई भी शासन-प्रशासन और अभी तक तैनात हुए कुलपति भी नहीं छुड़ा पाए हैं। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. आशीष वाखलू और फिजियोलॉजी के डॉ. संदीप भट्टाचार्य ही नहीं संस्थान के 50 फीसदी से अधिक चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए कुख्यात हैं।
यही नहीं वो अभी चोरी-छिपे लगातार प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त हैं। इनके बारे में बाकायदा भाजपा नेता विनय कटियार सहित कई सांसदों और विधायकों ने भी शिकायतें की थीं।