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केजीएमयू ने मनाया 117वां स्थापना दिवस, प्रमुख सचिव बोले-युवा डॉक्टरों को नेतृत्व की भी मिले दीक्षा

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लखनऊ। चिकित्सा के क्षेत्र में ऊंचे मुकाम पर मौजूद डॉक्टर एक अच्छा नेतृत्वकर्ता भी हो यह जरूरी नहीं है। इसलिए युवा डॉक्टरों को चिकित्सा संस्थानों के नेतृत्व के लिए पहले से ही तैयार करना होगा। रविवार को केजीएमयू के 117वें स्थापना दिवस पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने यह बात कही। समारोह में पदक विजेता मेधावियों के साथ कर्मचारी और शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।
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इस मौके पर केजीएमयू के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. रमाकांत ने पदक विजेताओं को असंभव सपने देखने के लिए प्रेरित किया। कहा कि जब आप असंभव सपने देखना शुरू करते हैं तो असंभव लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार भी होने लगते हैं। इस अवसर पर कुल 55 मेधावी छात्र-छात्राओं, फैकल्टी, बेस्ट डिपार्टमेंट अवॉर्ड एवं बेस्ट ग्रीन डिपार्टमेंट अवॉर्ड भी दिए गए। कार्यक्रम में आईआईएम की निदेशक प्रो. अर्चना शुक्ला को मुख्य अतिथि के रूप में आना था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह नहीं आ सकीं। डीन एकेडमिक डॉ. उमा सिंह ने कहा कि मेडल पाने वाले मेधावियों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी से करें। प्रति कुलपति प्रो. विनीत शर्मा ने धन्यवाद दिया। कार्यक्रम का संचालन स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रो. अमिता पांडेय और डॉ. सौमेंद्र विक्रम सिंह ने किया।
केजीएमयू ने दिए 30 हजार से ज्यादा चिकित्सक
कार्यक्रम का शुभारंभ केजीएमयू कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के साथ किया। उन्होंने बताया कि 117 साल में केजीएमयू ने दुनिया को 30 हजार से ज्यादा डॉक्टर दिए हैं। उन्होंने बताया कि अक्तूबर 1911 में 31 एमबीबीएस छात्रों के पहले बैच ने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था।
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2100 कर्मचारी हुए सम्मानित
केजीएमयू के स्थापना दिवस समारोह में संस्थान के 2100 कर्मचारियों को कोरोना संक्रमण काल के दौरान विशिष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया। केजीएमयू कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रदीप गंगवार और उपाध्यक्ष अतुल उपाध्याय के साथ अन्य पदाधिकारियों ने कर्मचारियों के लिए यह सम्मान प्राप्त किया।
स्थापना दिवस पर इनका हुआ सम्मान
एमबीबीएस : अनन्या त्रिपाठी, अविरल दुआ, आराध्या गर्ग, वाई आशुतोष भारद्वाज, आयुष साहू, सोनल यादव, निकिता चौहान, रामजी बल्लभ, विदुषी वर्मा, मिशक्त फातिमा, अंजलि सिंघल, गुनीत कौर, अनामिका गुप्ता, दीपक बंसल, अपराजिता कुलश्रेष्ठ, अपर्णा सिंह, लिपिका अग्रवाल, महिमा केशरी, विक्रम पाल, सुमित सिंह, कौशल किशोर सिंह, प्रिया गंगवार, अनुभव मुखर्जी, प्रद्युत कुमार अमात, दुर्गेश्वरी बालाजी, शिवा गुप्ता, आयशा खान, निशांत आर सुभाष, आकांक्षा, पूर्वी गुप्ता, दिव्यांशु गुप्ता, देवांशी कटियार, गिरजानंद मिश्रा।
बीडीएस : आस्था, इनजिला फातिमा, नेहा रानी, गुंजन मेहता, अस्मिता द्विवेदी, अभिनव कुमार, अनामिका वर्मा, ध्रुतिका जाधव, सपना गौतम, सारा खान, पल्लवी, फ्लॉरेंस साइलो, आकुमजुक, विशाल यादव, अनुष्का पांडेय, साराह फुरकान, मोनिका चौधरी, अंशुल अग्रवाल, ऋषभ पांडेय।
नर्सिंग : रचना गंगवार, इंद्रावती सिंह, योगेश कुमार बंसल।
उत्कृष्ट सेवा के लिए डॉ. प्रज्ञा पांडेय सम्मानित
कोविड संक्रमण काल में उत्कृष्ट सेवा करने के लिए डॉ. प्रज्ञा पांडेय को विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया। इससे पहले डॉ. प्रज्ञा पांडेय को रिसर्च शोकेस में भी बेस्ट रिसर्च पेपर के लिए सम्मानित किया गया था।
पदक विजेता मेधावियों ने बताई दिल की बात
परिवार की चौथी डॉक्टर
मेरे परिवार में मुझसे पहले मेरी मां, पिता और बहन डॉक्टर हैं। अंदाजा नहीं था कि एमबीबीएस में टॉप करने पर मुझे मेडल मिलेंगे। यह दिन मेरे लिए बेहद अहम है। मेरा लक्ष्य एमएस करके सर्जरी के क्षेत्र में अपना नाम बनाना है।
डॉ. अनन्या त्रिपाठी, एमबीबीएस टॉपर
बहन के बाद भाई को पदक
मेरी बहन डॉ. अनामिका गुप्ता ने वर्ष 2007 में केजीएमयू से पढ़ाई की थी। उस समय उनको गोल्ड मेडल मिला था। आज मुझे भी मेडल मिला है तो लगा कि वह सपना पूरा हो गया। मेरा मकसद न्यूरो सर्जरी में नाम कमाना है।
डॉ. आयुष साहू, सेकेंड टॉपर
सेहत, पढ़ाई और खेल तीनों में अव्वल
मेरी मां नीतू सिंह एथलीट थीं। उनसे सीख लेकर हमेशा से ही सुबह जल्दी उठकर दौड़ना मेरी आदत में था। जल्दी उठने के बाद पढ़ाई करने का भी काफी समय मिल जाता है। इसी वजह से मुझे एमबीबीएस में दाखिला मिल सका।
पूर्वी चौधरी, बेस्ट गर्ल एथलीट
खेल भी है जीवन महत्वपूर्ण अंग
पढ़ाई के साथ ही खेल जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। इसलिए मैंने पढ़ाई के साथ ही खेलना भी जारी रखा। रोजाना शाम को मैं अपने खेल के लिए थोड़ा सा समय निकालता हूं। केजीएमयू में बक्ली कप जीतना बहुत बड़ी उपलब्धि है।
सौरभ सिंह, बेस्ट एथलीट
मेहनत से मिलती है सफलता
मेहनत करने वालों को सफलता जरूर मिलती है। मेरी मां नर्स और मेरे पिता रेडियो टेकभनीशियन हैं। अपने परिवार में पहला डॉक्टर हूं। जूनियर्स को सलाह देना चाहता हूं कि लक्ष्य बनाकर काम करें, सफलता जरूर मिलेगी।
डॉ. आशुतोष भारद्वाज, एमबीबीएस में तीसरा स्थान
मेडिसिन के क्षेत्र में जाना है आगे
मेडिसिन का क्षेत्र मुझे बहुत पसंद है। सबसे ज्यादा मरीज इससे संबंधित ही आते हैं। थ्योरी में सबसे ज्यादा नंबर हासिल करने के साथ ही प्रैक्टिकल जीवन में भी मुझे अपना नाम रोशन करना है। मेरे मम्मी और पापा दोनों डॉक्टर हैं।
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डॉ. आराध्या गर्ग, मेडिसिन टॉपर
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