सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए ‘ई-विलेज’ स्कीम का कौशांबी मॉडल पूरे प्रदेश के लिए नजीर बन गया है।
सरकार ने सूबे के सभी 75 जिलों में चयनित एक-एक गांव में इस मॉडल को लागू करने का फैसला किया है।
विशेष सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स जीएस नवीन कुमार ने बताया कि इस संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।
इसके तहत लोगों को जनसेवा केंद्रों पर ही ई-सिस्टम से प्रमाण पत्र मिल जाएंगे। ई-विलेज स्कीम लागू करने के बाद सरकार इसे ई-तहसील के रूप में विस्तार देगी।
शासन ने हर जिले के किसी एक गांव का चयन कर उसमें ई-विलेज योजना लागू करने का फैसला किया था।
इसमें विभिन्न प्रमाणपत्र, पेंशन आवेदन व राशन कार्ड जैसी सुविधाएं ई-सिस्टम से उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
कौशांबी जिले में एक ई-विलेज वेब बेस्ड एप्लीकेशन विकसित कर यह स्कीम सफलतापूर्वक लागू की गई। वहां लोगों को नए सिस्टम से कई सेवाएं मिलनी शुरू हो गई हैं।
ई-विलेज के लिए इस तरह करेंगे काम
-गांव का सर्वे कर परिवार रजिस्टर की विभिन्न महत्वपूर्ण सूचनाओं का डिजिटलाइजेशन किया जाएगा। इसके लिए डोर-टू-डोर सर्वे कराया जाएगा।
-सर्वे के लिए एक प्रारूप विकसित किया गया है जिसमें गांव केहर व्यक्ति के बारे में विस्तृत जानकारी होगी।
-इसमें मकान नंबर, पता, मुखिया व परिवार के सदस्यों के नाम, वैवाहिक स्थिति, धर्म, जाति, उपजाति, शैक्षिक योग्यता, जन्म तिथि, आय, एपीएल व बीपीएल श्रेणी की स्थिति, मकान कच्चा या पक्का, खेती से आय, राशन कार्ड संख्या, वोटर कार्ड संख्या, आधार कार्ड आदि से जुड़ी सूचनाएं दर्ज की जाएंगी।
-डाटा सर्वे व डिजिटलाइजेशन की जिम्मेदारी संबंधित जिले के ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर की होगी। लेखपाल व ग्राम पंचायत अधिकारी डाटा का सत्यापन करेंगे।
-इसके बाद संबंधित लेखपाल, एसडीएम, तहसीलदार द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर कर इन सूचनाओं को प्रमाणित करेंगे।
-इन सूचनाओं को नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा ताकि ई-गवर्नेंस की अन्य योजनाओं में इसका इस्तेमाल किया जा सके।
-ई-विलेज वेब बेस्ड एप्लीकेशन का विकास किया जाएगा जिससे विभिन्न शासकीय सेवाएं दी जा सकेंगी।
सीएम खुद रख रहे नजर
ई-विलेज स्कीम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की व्यक्तिगत पहल पर शुरू की गई है। नियमित अंतराल पर वे खुद इसकी प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं।