बुजुर्ग समाज सेवी सर्वेश पांडेय बताते हैं, 1860 के बाद अंग्रेजों ने शहर का औद्योगीकरण शुरू कर दिया था। कपड़ा मिलें लगने लगीं। क्राइस्टचर्च, ब्रह्मानंद, पीपीएन, डीएवी जैसे कालेज थे। सर्वेश बताते हैं 1960 के आसपास इलाज के लिए एक बड़ा अस्पताल उर्सला शुरू हो गया था। कानपुर का सबसे बड़ा अस्पताल हैलट था। तब वहां जंगल था। लोग जाने में डरते थे।
काशी के घाटों पर बात करते पद्मविभूषण पंडित छन्नू लाल मिश्र बचपन की यादों में खो जाते हैं... वे बताते है पहले गंगा के ज्यादातर घाट कच्चे थे। खांटी बनारसियों की सुबह और शाम घाट किनारे बीतती थी। बनारस आने वाले श्रद्धालुओं का मकसद सिर्फ गंगा स्नान ही होता था। अब घाटों का भव्य स्वरूप है।
गिनती की दुकानों पर मिल पाते थे सेब-लड्डू
बागपत के छपरौली से पांच बार विधायक रहे बुजुर्ग एडवोकेट चौधरी नरेंद्र सिंह बताते हैं, आजादी मिली तब वे 12 साल के थे। 1951 में मेरठ कॉलेज में 11वीं में पढ़ने आए थे। बेगमपुल से हापुड़ अड्डे की सड़क उस समय भी डामर की थी। तब सेब बड़े लोगों का फल कहलाता था। 1960 तक तक यह हालात थे कि खांड के बूंदी वाले लड्डू तेरहवीं या शादी के लिए भी बमुश्किल मिल पाते थे।
पहली फ्लाइट इम्पीरियल एयरवेज ने आजादी के पहले जुलाई 1933 में कराची-जोधपुर-दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद-कोलकाता रुट पर शुरू की, लेकिन 1940 तक यह बंद हो गई। 1960 के बाद यूपी की पहली विमान सेवा लखनऊ से दिल्ली के बीच शुरू हुई। पहला विमान डकोटा था। अंदर जीप जैसी जगह में 25-30 लोग सफर करते थे। किराया 62 रुपये था। अब राज्य के आठ शहरों से देश के प्रमुख शहरों के लिये उड़ानें हैं और दो अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट लखनऊ और वाराणसी में हैं। कुशीनगर, जेवर व अयोध्या में एयरपोर्ट के संचालन के साथ यूपी इकलौता ऐसा राज्य होगा, जहां पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होंगे।
अब अनाज उत्पादन में शीर्ष पर
कई बार सूखा झेल चुके राज्य का अब 210 लाख हेक्टेयर से ज्यादा इलाका सिंचित है। अनाज उत्पादन में पहले स्थान पर। दुग्ध उत्पादन, मांस उत्पादन और निर्यात में भी यूपी पहले स्थान पर है।
बढ़ रहा है विदेशी निवेश
1960 के बाद औद्योगिक रफ्तार बढ़ी। अब राज्य में छोटी-बड़ी चीज के साथ आधुनिक मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन से लेकर हवाई जहाज तक बन रहे हैं। पिछले चार वर्षों में कोविड के दो वर्षों के बावजूद सिर्फ अमेरिका की ही 40 कंपनियों ने 17 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी नोएडा ने विकास की नई कहानी लिख दी। चंद वर्षों में ही यह आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेवा क्षेत्र की कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का पसंदीदा कार्यक्षेत्र बन गया। अब लखनऊ से लेकर कानपुर-बुंदेलखंड के इलाके में डिफेंस कॉरिडोर बनाया जा रहा है। कानपुर में सॉफ्टवेयर पार्क बनाया गया। ऐसे पांच और सॉफ्टवेयर पार्क बनने हैं।
पांच गुना बढ़ा सड़कों का जाल...पांच शहरों में मेट्रो
आजादी के वक्त प्रदेश में सड़कों की लंबाई करीब 50 हजार किमी थी, ज्यादातर कच्ची या कंकर की। अब 2.70 लाख किमी पक्की सड़कें हैं। हर साल सड़कों में 3-4 हजार किमी की वृद्धि हो रही है। वहीं, दो शहरों में मेट्रो चल रही है और जल्द ही कानपुर, आगरा सहित तीन और शहरों में शुरू हो जाएगी। दिल्ली-मेरठ के बीच देश की पहली रैपिड रेल पर काम चल रहा है।
15 मई 1947 को लखनऊ-बाराबंकी के बीच पहली बस चली थी। चारबाग स्टेशन के सामने इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज परिसर के पीपल के पेड़ के नीचे से 12 बसों से संचालन शुरू हुआ था। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष 82 वर्षीय चंद्रशेखर पांडेय बताते है कि रोडवेज के गठन के बाद चारबाग एवं कैसरबाग में बस अड्डे बने। 12 बसों से 11,500 बसों तक पहुंचे। रोजाना 16 लाख लोग सफर करते हैं।
कानपुर कार्यशाला में बनी पहली बस : आजादी के बाद राजकीय रोडवेज ने फरवरी 1948 में 22 सीटर पहली बस कानपुर कार्यशाला में बनाई थी।