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लखनऊ मेट्रो में नौकरी की बाढ़,आपने किया आवेदन?

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लखनऊ मेट्रो अभी शुरू नहीं हुई है लेकिन मेट्रो में चलने के साथ लखनऊ मेट्रो में नौकरी करने का भी जबर्दस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। मैट्रो में तकनीक और एकाउंट सहायक की आठ वर्ग में वैकेंसी के लिए आवेदनों की बाढ़ आ गई है। अभी इस पदों के लिए अप्लाई करने की प्रक्रिया चल रही है। यदि आपने अभी तक अप्लाई न किया हो तो यह आपके लिए एक बड़ा मौका हो सकता है।
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लखनऊ मेट्रो के एलएमआरसी के पास अब तक 73 पोस्ट के लिए 17,000 आवेदन आ चुके हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 21 जून है। ऐसे में एलएमआरसी अधिकारी आवेदनों की संख्या बढ़कर 40,000 तक पहुंचने की उम्मीद जता रहे हैं।

ऐसे में यह परीक्षा छह शहरों में 28 जून को सुबह 10 बजे से कराई जाएगी। 90 मिनट की यह बहुविकल्पीय परीक्षा होगी। इसका परिणाम चार दिन में एलएमआरसी जारी कर देगा। इसके बाद 10 दिन दस्तावेज की जांच के लिए रहेंगे।
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दिखाया गया कैसे होंगे लखनऊ के मेट्रो स्टेशन

राजधानी में मैट्रो स्टेशन का लुक कैसा होगा? इसकी जिज्ञासा बुधवार को लखनऊ मैट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) को शांत कर दी। मैट्रो अधिकारियों ने मैट्रो स्टेशन का फर्स्ट लुक जारी किया है। पहले चरण में बनने वाले आठ में सात मेट्रो स्टेशनों का लुक जारी किए मॉडल की तरह होगा। एक मैट्रो स्टेशन श्रृंगारनगर का डिजाइन केवल अलग होगा जिसे एलएमआरसी अभी तैयार करा रहा है।

बुधवार को एलएमआरसी के कार्यालय में एक प्रेसवार्ता में एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने मैट्रो स्टेशन के डिजाइन को जारी किया। कुमार केशव ने बताया कि इन डिजाइन को फ्रांस की कंपनी सिस्ट्रा तैयार कर रही है। डिजाइन कर रही कंपनी ने श्रृंगारनगर के अलावा दूसरे सात स्टेशनों के लिए यह मॉडल तैयार किया है। डिजाइन का काम 90 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। अब इसमें केवल फिनिशिंग का काम ही रह गया है।

अब तक बने डिजाइन से हालांकि हमें अंदाजा हो गया है कि हमारी मैट्रो के स्टेशन तैयार होने के बाद कैसे दिखेंगे। स्टेशनों को पूरी तरह खास दिखाने की कोशिश एलएमआरसी ने फ्रांस की कंपनी के साथ मिलकर की है।

एक सवाल के जवाब में कुमार केशव ने बताया कि हर मैट्रो स्टेशन के इंटीरियर पर लखनऊ की अवधी कला की छाप दिखेगी। मैट्रो स्टेशन के अंदर यहां की कला को प्रदर्शित किया जाएगा। स्टेशन की बाकी चीजें जैसे टिकट काउंटर भले ही जयपुर और दिल्ली की तरह ही दिखें लेकिन इंटीरियर कुछ अलग होगा। उन्होंने बताया कि एक स्टेशन के निर्माण पर करीब 28 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। यह लागत जगह और वहां इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे टिकट काउंटर, प्रवेश व निकास द्वार की संख्या और दूसरे निर्माण पर यह निर्भर करेगी।

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यूटीलिटी शिफ्टिंग बनी बड़ी मुसीबत

कुमार केशव ने बताया कि मैट्रो के काम में सबसे ज्यादा समस्या यूटीलिटी शिफ्टिंग को लेकर आ रही है। बीएसएनएल, जलकल और तेल कंपनियां की लाइन काम को अटका रही हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि आलमबाग की पार्किंग पर ही यूटीलिटी शिफ्टिंग में हमें दो महीने लग गए। बीएसएनएल हमें 25 लाख रुपए का बिल दे चुका है। उनसे बात हो रही है। जलकल ने दो नए ट्यूबवैल की मांग कर दी।

इनकी कीमत 70 लाख रुपए होती। अब उनसे एक ट्यूबवैल लगाने केलिए वार्ता हो रही है। आलमबाग में ही बिजली विभाग केतीन ट्रांसफॉर्मर हमें हटाने पड़े। हालात यह हैं कि किसी भी विभाग के पास अपने ही काम का यूटिलिटी मैप नहीं है।

 इससे पता ही नहीं चल पाता कि जमीन के अंदर कहां क्या है। लंबे समय में सड़क चौड़ीकरण से यूटिलिटी बीच में आ गई हैं। मैप नहीं होने से हम केवल ट्रेंचिंग पर ही निर्भर हैं। खुदाई के बाद लाइन मिलने पर संबंधित विभाग को सूचना दे दी जाती है। कई बार तो एक ही जगह पर एक से अधिक एजेंसी की लाइन मिल जाती है। उनकी पहचान तक हमें करानी पड़ती है। यह मैट्रो के काम को धीमा करती है।

मैट्रो पिछले एक सप्ताह में एक पांच यू-गर्डर ही रख सकी है। इससे अब यू-गर्डर की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इससे औसत अब एक दिन में एक यू-गर्डर से नीचे आ गया है। मैट्रो अधिकारियों का कहना है कि हमारा फोकस अभी यू-गर्डर रखने पर नहीं है। इसकेउलट अब कार्यदायी संस्था से पीयर कैप का काम तेज करा रहे हैं। अब तक हम 35 पीयर कैप रखवा चुके हैं।

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