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जेईई एडवांसः तैयारी के दौरान मां को हुआ था कैंसर, श्रेया ने नहीं हारी हिम्मत, गर्ल्स कैटेगरी में देश में चौथा स्थान

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देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए एडमिशन गेटवे जेईई एडवांस में एक फिर राजधानी की मेधा ने परचम लहराया है। शहर की बेटी श्रेया तिवारी ने गर्ल्स कैटेगरी में देश भर में चौथा स्थान और कानपुर जोन की गर्ल्स कैटेगरी में टॉप किया है। इतना ही नहीं उसने ऑल इंडिया रैंक 279वीं भी प्राप्त की है।
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साथ ही तीरथ अग्रवाल ने 482वीं, अथर्व गुप्ता ने 737वीं, रवीजा चंदेल ने 743, आयुष्मान पांडेय ने 748वीं, आर्यन मौर्या ने 870वीं, आयुष पटेल ने 885वीं, राघव सिंह ने 974वीं ऑल इंडिया रैंक प्राप्त की है।
जेईई एडवांस में अपनी मेधा का लोहा मनवाने वाले अधिकतर विद्यार्थी आईआईटी बांबे व दिल्ली से कंप्यूटर साइंस से बीटेक कर अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
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इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू
आईआईटी खड़गपुर ने जेईई एडवांस परिणाम के साथ ही एनआईटी, आईआईटी, ट्रिपलआईटी आदि इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग भी शुरू कर दी है। शनिवार से इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले चरण का सीट अलॉटमेंट 27 अक्तूबर को जारी होगा। 24 अक्तूबर को मॉक सीट एलोकेशन व चॉइस भरवाई जाएगी। पूरी काउंसिलिंग प्रक्रिया छह चरण में आयोजित की जा रही है।
मां के शब्दों को बनाया सफलता का मंत्र
श्रेया तिवारी : एआईआर 279
मैं आईआईटी बांबे से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक करना चाहती हूं। अभी भविष्य के बारे में तो नहीं सोचा, लेकिन इसी फील्ड में कॅरिअर बनाना है। जेईई मेन के पहले चरण के दौरान माध्यमिक शिक्षा विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर मां सांत्वना तिवारी को कैंसर होने की जानकारी मिली। इससे मानसिक रूप से काफी विचलित हुई हालांकि इसमें 99.96 परसेंटाइल मिले। फिर मां की सेवा और सीधे एडवांस की तैयारी में लग गई। इस दौरान काफी मानसिक तनाव से गुजरी हूं, लेकिन मां ने कहा कि मेरी खुशी तुम्हारी तरक्की में ही है। इसके बाद मैंने और उत्साह से तैयारी शुरू की। मौका मिला तो मेंटल हेल्थ के लिए काम करूंगी, क्योंकि मैं उस ट्रॉमा से गुजरी हूं। मां-पिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन को ध्यान में रखकर तैयारी करें, सफलता जरूर मिलेगी। नॉवेल पढ़ने में रुचि है। पिता सुरेंद्र कुमार तिवारी माध्यमिक शिक्षा विभाग में संयुक्त शिक्षा निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
जेईई मेन एक या दो ही काफी
तीरथ अग्रवाल : एआईआर 482
कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार शिक्षा मंत्रालय ने विद्यार्थियों को राहत देते हुए जेईई मेन का आयोजन साल में चार बार कराया, लेकिन यह बहुत ज्यादा था। मुझे लगता है कि एक या दो अवसर काफी हैं। क्योंकि इसके बाद कोई सीरियस नहीं लेता है। मैं आईआईटी बांबे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करके अपनी खुद की कंपनी खोलना और लोगों को रोजगार देना चाहता हूं। मेरा शुरुआत से ही कंप्यूटर की तरफ रुझान था तो इसी लाइन में कॅरियर बनाने की तैयारी की। जेईई मेन में पहले प्रयास में 99.76 पर्सेंटाइल आने के बाद से ही एडवांस की तैयारी में लग गया था। मॉक टेस्ट से तैयारी में काफी सहयोग होता है। हमें एक बार में सफलता न मिले तो भी लगे रहना चाहिए। पिता वीरेंद्र कुमार अग्रवाल की जनरल मर्चेंट की दुकान है और मां अनीता अग्रवाल गृहिणी हैं। हालांकि उन्होंने कभी मुझे कोई कमी नहीं महसूस होने दी।
रोबोटिक्स के क्षेत्र में बनाना है कॅरिअर
- अथर्व गुप्ता : एआईआर 737
मेरी रोबोटिक्स में रुचि है और इसी क्षेत्र में अपना कॅरिअर बनाना चाहता हूं। एक ऐसा रोबोट जो आम लोगों के जीवन को आसान बनाने में कुछ सहयोग कर सके। आईआईटी बीएचयू से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना चाहता हूं। मेरा मानना है कि पढ़ाई में घंटे मायने नहीं रखते हैं, बस जब भी पढ़े डेडीकेट होकर पढ़ाई करें। शेड्यूल बनाकर पढ़ाई करें और ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट दें। ऑनलाइन एजुकेशन भी एक अच्छा विकल्प है, इससे हमारा काफी समय बचता है। पिता उत्तम गुप्ता की अपनी दुकान है और मां ज्योति गुप्ता गृहिणी हैं।
कुछ अलग करना चाहती हूं
- रवीजा चंदेल : एआईआर 743
मैं आईआईटी दिल्ली से बीटेक करके कोडिंग के क्षेत्र में शोध करना चाहती हूं। मेरी शुरुआत से ही इसमें रुचि थी, जिसकी वजह से मैंने सिर्फ इसी को लक्ष्य बनाकर तैयारी की। मेरा मानना है कि लक्ष्य बनाकर पढ़ाई करने से सफलता जरूर मिलती है। हमें शिक्षकों के बताए तरीकों से तैयारी करनी चाहिए। पिता आनंद कुमार सिंह अधिवक्ता व मां सुधा डॉक्टर हैं।
आईएएस बनकर करना है सुधार
- आयुष्मान पांडेय : एआईआर 748
मेरी इलेक्ट्रिकल में रुचि है और इसी से आईआईटी दिल्ली से बीटेक करना चाहता हूं। आगे चलकर यूपीएससी की तैयारी करनी है। मैं आईएएस बनकर कुछ सुधार करना चाहता हूं। क्योंकि देश-प्रदेश में योजनाएं तो बहुत चल रही हैं, लेकिन वह जमीनी रूप से उतनी सफल नहीं हो पाती हैं। पिता अमित पांडेय गृह मंत्रालय व मां मनीषा पांडेय भी केंद्रीय कर्मचारी हैं। मैंने मॉक टेस्ट ज्यादा दिए और उसका काफी फायदा भी मिला।
रोज देता था मॉक टेस्ट
आलोक मिश्रा : एआईआर 2556
मेरा शुरू से ही आईआईटी से इंजीनियरिंग करने का सपना था। आज यह सपना साकार होने जा रहा है। अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और अपने स्कूल अवध कॉलिजिएट को देता हूं। मैंने कक्षा पांच से यहां पढ़ाई की। मेरी इंजीनियर बनने की इच्छा पर स्कूल के शिक्षकों ने हमेशा प्रोत्साहित किया। इंटर के साथ ही मैं इसकी तैयारी में जुट गया। मैंने सभी विषयों पर बराबर फोकस किया, इससे काफी हद तक कोर्स कवर कर रिवीजन करने में मदद मिली। परीक्षा से पहले रिवीजन के दौरान रोज एक टेस्ट देता था। दूसरे छात्रों को सलाह है कि वे तैयारी के साथ-साथ मॉक टेस्ट जरूर दें।
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