इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) ने यूपी में कोरोना संक्रमण की भयावह स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार से हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का आग्रह किया है। साथ ही प्रधानमंत्री व चुनाव आयोग से पंचायत चुनाव स्थगित करने की मांग की है।
इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीपी मिश्र एवं महामंत्री प्रेमचंद्र ने प्रधानमंत्री एवं चुनाव आयोग को फिर पत्र भेजकर आग्रह किया है कि पंचायत चुनाव को तत्काल रोका जाए, क्योंकि चुनाव ड्यूटी में लगे हजारों कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं और कई कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है। पदाधिकारियों ने कहा जहां-जहां चुनाव हो रहे हैं वहां कर्मचारी चुनाव ड्यूटी नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
क्योंकि उन्हें कुछ हो गया तो उनके परिवार की देखभाल कौन करेगा? जिन्हें पुरानी पेंशन नहीं मिल रही है उन कर्मचारियों की मौत पर उनके परिवार को कुछ भी नहीं मिल रहा है। इप्सेफ की मांग है कि मृत कर्मचारियों के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा, पारिवारिक पेंशन, मृतक आश्रित को नौकरी एवं समस्त देयकों का तत्काल भुगतान किया जाए। संगठन के सचिव अतुल मिश्रा ने भी सरकार पर कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
‘तत्काल रोके जाएं पंचायत चुनाव’
उप्र पीडब्ल्यूडी मिनिस्टीरियल एसोसिएशन ने भी तत्काल पंचायत चुनाव स्थगित करने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव व प्रांतीय महामंत्री जेपी पांडेय ने कहा है कि कोरोना से इस समय हालात बेकाबू हैं।
मुख्यालय से लेकर कई जिलों के अभियंता व कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो रहे हैं और कई कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। पंचायत चुनाव में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कोई कारगर इंतजाम नहीं किए गए हैं। प्रवक्ता सीपी श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन ने 12 अप्रैल को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के लिए सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की गई थी, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
आलम यह है कि मुख्यालय में तैनात रहे कई कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो चुकी है। 19 अप्रैल को पंचायत चुनाव की ड्यूटी के बाद प्रधान सहायक कमलेश कुमार की मंगलवार सुबह 10:30 बजे मौत हो गई। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बुखार पीड़ित होने के बावजूद कर्मचारियों से ड्यूटी कराई जा रही है। इससे कर्मचारियों में खौफ है।