आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार ने बुधवार को ट्वीट कर सूबे के डीजीपी समेत महकमे के आला अफसरों पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा, डीजीपी के दबाव में उनके एफआईआर पर आठ महीने में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यही नहीं, मुल्जिमों के कहने पर आईजी पर दबाव बनाकर इस मामले की जांच को नोएडा से गाजियाबाद स्थानांतरित करा दिया गया। हालांकि इसी महीने चार तारीख को बिसरख पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी।
दरअसल, 11 जुलाई 2016 को हिमांशु ने अपनी पत्नी के खिलाफ ई-मेल आईडी हैक करने व अन्य गोपनीय जानकारी चोरी करने का आरोप लगाते हुए नोएडा के बिसरख थाने में आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने ससुराल पक्ष के आधा दर्जन लोगों को भी आरोपी बनाया था। हिमांशु उस समय एसएसपी एसटीएफ, नोएडा के पद पर तैनात थे।
बता दें, हिमांशु और उनकी पत्नी प्रिया काफी समय से अलग-अलग रह रहे हैं। प्रिया ने पटना जिला अदालत में दहेज उत्पीड़न का केस भी फाइल किया हुआ है। हिमांशु ने आरोप लगाया कि जब एक आईपीएस अधिकारी को अपने केस में इतना झेलना पड़ रहा है तो आम लोगों का क्या हाल होता होगा।
मामले की होनी चाहिए निष्पक्ष जांच
डीजीपी जावीद अहमद
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डीजीपी जावीद अहमद और प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलों में तैनात पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि थानों में दलालों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए और थानेदारों के कारखास पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
इसके बाद नोएडा में 44 और मेरठ में तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। मेरठ में 62 अन्य पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर भी किया गया। इस पर हिमांशु का कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों को हटाया गया है, वे सभी जाति विशेष के लोग हैं।
अगर ये पहले से ऐसे कामों में लिप्त थे, जिससे पुलिस की बदनामी हो रही थी तो पहले यह कार्रवाई क्यों नहीं की गई? कहा, इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सपा सरकार में कई अहम पदों पर रह चुके हैं हिमांशु
हिमांशु कुमार
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हिमांशु कुमार ने आरोप लगाया है कि उन्हें कुछ महीनों से लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी हिमांशु को अब तक छह जिलों महराजगंज, श्रावस्ती, हापुड़, कासगंज, मैनपुरी और फिरोजाबाद में बतौर एसपी बनाकर भेजा जा चुका है।
इसी महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग के निर्देश पर हिमांशु को फिरोजाबाद के एसपी के पद से हटा कर डीजीपी ऑफिस से अटैच कर दिया गया था, लेकिन वे डीजीपी आफिस में आमद कराने के बजाय मेडिकल लीव पर चले गए थे।
डीजीपी बोले- कार्रवाई सिर्फ नोएडा में नहीं पूरे प्रदेश में हो रही
डीजीपी जावीद अहमद का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ नोएडा में नहीं, बल्कि कई और जिलों में की गई है। इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया था।
किसी जाति विशेष के खिलाफ कार्रवाई जैसे निर्देश कहीं किसी को नहीं दिया गया है। यहां से जो भी निर्देश दिए गए, वह निष्पक्ष कार्रवाई के दिए गए।