आजमगढ़ और मिर्जापुर में फर्जी मदरसों की एसआईटी जांच पूरी हो गई है। एसआईटी ने दोनों जिलों में संचालित इन फर्जी मदरसों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए शासन से अनुमति मांगी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2009-10 में आजमगढ़ व मिर्जापुर में बिना भौतिक सत्यापन के कई मदरसों को मान्यता दी गई थी। बाद में उन्हें करोड़ों रुपये का अनुदान दिया गया। वर्ष 2017 में इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई। मुख्यमंत्री ने इसकी जांच के आदेश दिए। एसआईटी जांच में कई मदरसे फर्जी पाए गए। इसमें अल्पसंख्यक विभाग के कई बाबू और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है।
सूत्रों का कहना है कि मिर्जापुर में एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने घोटाले को उजागर किया था। जांच में यहां संचालित 143 मदरसों में से कई मदरसे फर्जी पाए गए थे। इसी तरह आजमगढ़ में लगभग 250 मदरसों की जांच की गई है। इनमें से कई मदरसे सिर्फ कागजों पर चलते मिले। इन मदरसों के नाम पर कई अध्यापकों का वेतन उठाया जाता रहा। हालांकि मामला उजागर होने पर वर्ष 2017 से सभी शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया।