आलमबाग बस अड्डे और मेट्रो रेल स्टेशन के लिए समग्र (इंटीग्रेटेड) डिजाइन बनाया जाएगा। आलमबाग बस अड्डे को प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) के आधार पर विकसित किया जाना है।
इसमें नीचे बस अड्डा और ऊपर व्यवसायिक निर्माण किया जाएगा। इसलिए सामने बनने वाले मेट्रो स्टेशन की डिजाइन कुछ इस तरह से किया जाएगा कि दोनों ही तरह के परिवहन का उपयोग करने वाले यात्रियों को ज्यादा सुविधा हो।
इसको लेकर एलएमआरसी के निदेशक राजीव अग्रवाल और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के प्रबंध निदेशक मुकेश मेश्राम के बीच सोमवार को बैठक हुई। इसमें इंटीग्रेटेड डिजाइन बनाने पर सहमति बनी।
आलमबाग बस स्टेशन को पीपीपी मॉडल पर यूपीएसआरटीसी विकसित करने जा रहा है। इसमें नीचे बस अड्डा होगा और ऊपर कुछ मंजिलों पर व्यवसायिक कार्य होंगे।
यहां व्यवसाय करने वाली कंपनी को ही बस अड्डे का रखरखाव भी करना होगा। इस आशय के करार के आधार पर बस यात्रियों को बेहतर परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
बस अड्डे को लेकर बिडिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बहुत जल्द ही इसका डिजाइन फाइनल हो जाएगा। इसी के लिए मेट्रो और परिवहन निगम अधिकारियों के बीच बैठक हुई।
मेट्रो के निदेशक राजीव अग्रवाल ने बताया कि मेट्रो स्टेशन के निकास और प्रवेश की तरह ही आलमबाग बस स्टेशन को भी विकसित किया जाएगा।
कुछ इसी तरह से दोनों स्टेशनों के बीच किस तरह से बिना यातायात प्रभावित किए पहुंचा जा सके इसकी भी प्लानिंग की गई है।
इसके लिए भूमिगत रास्ते का भी विकल्प है। बस अड्डे के निर्माण को लेकर हुई मीटिंग में बहुत जल्द ही दोनों एजेंसियां अपनी-अपनी डिजाइन प्रस्तुत करेंगी।
वहीं, आलमबाग बस अड्डे के सामने फुटओवर ब्रिज मेट्रो स्टेशन और बस स्टेशन के इंटीग्रेटेड डिजाइन में अड़ंगा बन सकता है। दरअसल मेट्रो रूट फाइनल होने से पहले ही प्राधिकरण ने इस फुटओवर ब्रिज का निर्माण करवा दिया था।
अब जबकि, इस ब्रिज के उतरने के स्थान पर एक ओर मेट्रो स्टेशन बनना है और दूसरी ओर बस अड्डा विकसित किया जाना है।
दोनों ही परिस्थितियों में इस फुटओवर ब्रिज पर खतरा है। मेट्रो के एक अधिकारी ने बताया कि इस फुटओवर ब्रिज को भविष्य में हटाया भी जा सकता है।
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