यूं तो किसी भी काम में देरी को अच्छा नहीं माना जाता है, मगर लोहिया ग्रामीण आवास योजना में यह तरकीब फायदे का सौदा साबित हुई है।
शासन ने तय किया है कि जिन्होंने आवास बनाना शुरू कर दिया है, उन्हें योजना में बढ़ी लागत का लाभ नहीं मिलेगा। जिन्होंने अब तक आवास बनवाने की शुरुआत नहीं की है, वे बड़ा घर और बढ़ी रकम का बजट पाएंगे। प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अरुण सिंघल ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है।
दरअसल, शासन ने वित्तीय वर्ष 2014-15 के मध्य में लोहिया आवासों का आकार और लागत बढ़ाने का फैसला कर लिया। आवास का क्षेत्रफल 28.30 से बढ़ाकर 30 वर्ग मीटर और लागत 2.75 लाख से बढ़ाकर 3.05 लाख रुपये कर दी गई।