पूर्व सांसद अमर सिंह का कहना है कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव उनके शुभेच्छु हैं लेकिन वे पार्टी में लाचार और असहाय हैं।
प्रो. राम गोपाल यादव और आजम खां समाजवादी पार्टी के दो पहिये हैं। इनके रहते सपा में उनकी वापसी संभव नहीं है। बकौल अमर सिंह अब वह मुलायम सिंह नहीं रहे जिनकी कथनी-करनी में कोई अंतर नहीं रहता था। वह ‘नेताजी’ कहीं गुम हो गए हैं। अगर वो ‘नेताजी’ मिल जाएं तो सपा में उनकी वापसी हो सकती है।
गौरतलब है कि बृहस्पतिवार को मुलायम सिंह यादव ने दिल्ली में अमर सिंह से मुलाकात की थी। इसके बाद अमर सिंह मेडिकल चेकअप के लिए सिंगापुर रवाना हो गए।
शुक्रवार को सिंगापुर से फोन पर ‘अमर उजाला’ से बातचीत में अमर सिंह ने बताया कि मुलायम सिंह आए थे और उनसे कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत भी हुई।
...अब मुलायम की प्राथमिकता परिवार
अमर सिंह ने कहा कि जहां तक तक सपा में वापसी का सवाल है तो अब मुलायम की पहली प्राथमिकता परिवार है। दूसरी पार्टी, तीसरी आजम और चौथी मैं। मुलायम मेरे शुभेच्छु हैं, लेकिन असहाय और लाचार हैं।
अगर मुलायम को मुझे पार्टी में रखना ही था तो निकाला क्यों था? यही नहीं मेरी सदस्यता समाप्त कराने के लिए राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को पत्र तक लिख दिया।
राज्यसभा में मेरी सीट आगे से पीछे करवा दी। मैंने अपना राज्यसभा का कार्यकाल मुलायम की कृपा से नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अल्तमश कबीर (तत्कालीन) के आदेश से पूरा किया।
...पर समाजवाद के उन दो पहियों का क्या करूं
अमर सिंह ने कहा, हाल ही में मुलायम ने छह सांसद बनाए तब भी मेरे बारे में नहीं सोचा। हम तो अनवरत उनके पीछे रहे। उनके बड़े एहसान भी हैं, हमारे ऊपर। लेकिन समाजवाद के उन दो पहियों का क्या करूं, जिन्होंने मुलायम को लाचार व असहाय बना दिया है।
पार्टी में नंबर दो के नेता ने ‘नेताजी’ के जन्मदिन के कार्यक्रम को दाऊद, कसाब, अबू सलीम व उस तालिबान से फंडेड बताए जो मासूम बच्चों के कातिल हैं, इस पर भी जवाब आना चाहिए। जिन सपा नेताओं पर दाऊद से संबंध रखने के आरोप लगते हैं उस पर भी सफाई आनी चाहिए।
पीएम की तारीफ इसलिए की वह लाचार नहीं
अमर सिंह ने कहा, जहां तक प्रधानमंत्री की तारीफ का सवाल है तो भारत के नागरिक होने के नाते मै उनकी प्रशंसा कर रहा हूं, क्योंकि वह लाचार नहीं मजबूत प्रधानमंत्री हैं।