एसजीपीजीआई आने वाले मरीजों व तीमारदारों को जल्द ही ठहरने की उत्तम व्यवस्था मिल सकेगी। इसकेलिए यहां नया बहुमंजिला रैन बसेरा बनेगा। जमीन सिंचाई विभाग उपलब्ध कराएगा। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। एसजीपीजीआई में प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ ही नेपाल, मध्य प्रदेश, बिहार सहित अन्य राज्यों के भी मरीज आते हैं। यहां दो रैन बसेरे बने हुए हैं। इसके बाद भी लंबे समय तक भर्ती रहने वाले मरीजों के तीमारदारों को इधर-उधर ठहरना पड़ता है। एक दिन में जांच नहीं हो पाने पर दूसरे दिन जांच कराने के लिए मरीजों के सामने ठहरने की समस्या रहती है। इसे देखते हुए एसजीपीजीआई प्रशासन ने नए रैन बसेरे के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। इसमें बताया गया था कि एसजीपीजीआई कैंपस के सामने सड़क के दूसरी तरफ सिंचाई विभाग की 5393 वर्ग मीटर जमीन खाली पड़ी है। यह जमीन मिल जाए तो उस पर बहुमंजिला रैन बसेरा बनाकर तीमारदारों के ठहरने की व्यवस्था की जा सकती है। यह प्रस्ताव मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में रखा गया, जिसे मंजूरी दे दी गई है। सिंचाई विभाग खाली पड़ी इस जमीन को निशुल्क चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंपेगा। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि नए रैन बसेरे के लिए जमीन की मांग की गई थी। अब जमीन मिल गई है तो इस पर रैन बसेरा बनाने का विस्तृत प्लान तैयार किया जाएगा। इससे भर्ती होने वाले मरीजों के तीमारदारों के ठहरने की समस्या खत्म हो जाएगी।
कैबिनेट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के सुनियोजित विकास के लिए अक्तूबर-2011 में पारित आदेश के अनुपालन में भू-स्वामियों को दिए गए 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर के सापेक्ष 10 प्रतिशत अर्जन व्यय पर निहित 5 अरब 6 करोड़ 82 लाख 92 हजार 570 रुपये जमा किए जाने से छूट दिए जाने का निर्णय लिया है। भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध किसानों की ओर से दाखिल रिट याचिका पर यह आदेश दिया गया था। इससे राज्य व केंद्र सरकार पर कोई व्यय भार नहीं पड़ेगा। इस निर्णय से परियोजनाओं के आवंटियों से कोई अतिरिक्त राशि की वसूली की जरूरत भी नहीं रहेगी।
नाबार्ड की वित्तीय सहायता से बनने वाली पीडब्ल्यूडी की सड़कों की लागत में 5 वर्ष का रखरखाव का खर्च भी जुड़ेगा। यह व्यय परियोजना की कुल लागत का अधिकतम 10 प्रतिशत होगा। इस बारे में कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को लाए गए प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई। आरआईडीएफ (रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड) के तहत नाबार्ड वित्त पोषण करती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कार्य की स्वीकृत लागत में 5 वर्षों के अनुरक्षण की लागत भी जोड़ी जाती है। इस व्यवस्था को आधार मानते हुए पीडब्ल्यूडी में भी नाबार्ड वित्त पोषित सड़कों के लिए 5 वर्षीय अनुरक्षण लागत जोड़ने का प्रस्ताव लाया गया था।
कैबिनेट ने सहारनपुर में नागल-सहारनपुर मार्ग और शेखपुरा कदीम मार्ग के फाटक संख्या-84 पर रेलवे ओवरब्रिज बनाने के लिए 18197.60 वर्ग मीटर सिंचाई विभाग की भूमि निशुल्क पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इसके अलावा नहर के 1.20 चौड़े आयताकार आरसीसी चैनल के निर्माण के लिए 2.60 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया गया। यह राशि पीडब्ल्यूडी विभाग का प्रांतीय खंड मुहैया कराएगाए। इस निर्माण से 5 लाख मानव कार्य दिवस सृजित होंगे, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिलेगा।
प्रदेश कैबिनेट ने विधानसभा में असरकारी संकल्प और विधेयकों के प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए समिति गठित करने की स्वीकृति दे दी है। संसदीय कार्य व वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में यह समिति बनाई गई है। समिति में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री बेबीरानी मौर्य, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और कारागार एवं होमगार्ड राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मवीर प्रजापति को बतौर सदस्य शामिल किया गया है।
प्रयोगशाला परीक्षण ग्रेड एवं एचपीएलसी (हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमेटोग्राफी) ग्रेड विशुद्ध अल्कोहल अब विदेश से नहीं मंगवाया जाएगा। यूपी की डिस्टिलरियाें में ही इसे बनाया जाएगा। इस बाबत तैयार उप्र विश्लेषणात्मक श्रेणी और एचपीएलसी श्रेणी परिशुद्ध अल्कोहल प्रसंस्करण तथा बोतल भराई लाइसेंस नियमावली 2022 को मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में हरी झंडी दे दी गई। यह एक बड़ा कदम है जो यूपी के लिए भी बेहद अहम साबित होगा।
आबकारी एवं मद्य निषेध मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने बताया कि यह अल्कोहल प्रयोगशालाओं, दवाआें आदि के परीक्षण में मुख्य रूप से इस्तेमाल होता है। देश में इसका उत्पादन नहीं होता है और शत प्रतिशत बाहर से आयात किया जाता है। सबसे ज्यादा चीन से इसे मंगाया जाता है। सिर्फ यूपी में ही सालाना पचास लाख लीटर इस अल्कोहल की खपत है। यूपी की डिस्टलरियों में इसे बनाने की क्षमता तो थी, पर इसके उत्पादन के लिए कोई नियमावली नहीं थी। ऐसे में नियमावली तैयार की गई थी जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अब यूपी की डिस्टिलरियों में ही इस अल्कोहल को बनाया जाएगा और इसे बाहर से नहीं मंगाया जाएगा।
उत्पादन करने वाला पहला प्रदेश बनेगा यूपी
यूपी देश का ऐसा पहला राज्य बनेगा जो एचपीएलसी ग्रेड का अल्कोहल बनाएगा। इस अल्कोहल को न सिर्फ यूपी में इस्तेमाल किया जाएगा, बल्कि दूसरे राज्यों को भी दिया जाएगा। इससे यूपी की आय भी बढ़ेगी।
प्रस्तावित दरें
नियमावली के मुख्य प्रावधानों के तहत अल्कोहल स्वयं की आसवनी अथवा अन्य आसवनी से क्रय करने पर 5 रुपये प्रति ली की दर से लाइसेंस फीस लेने की व्यवस्था की गई है। एनालिटिकल ग्रेड एवं एचपीएलसी ग्रेड एब्सोल्यूट अल्कोहल की बॉटलिंग पर 11.50 रुपये प्रति लीटर की दर से बॉटलिंग फीस लगेगी। अनुज्ञापन की फीस एक लाख रुपये तथा 10 रुपये प्रति किलोलीटर की दर से प्लांट की क्षमता पर लाइसेंस फीस लगाया जाना प्रस्तावित है।