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Lucknow News: दिल में दर्द उठे तो आप सीएचसी नहीं बड़े अस्पताल जाएं

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लखनऊ। दिल के रोगियों को स्टेमी प्रोग्राम के तहत इलाज मिलना अभी चुनौती भरा है। कई केंद्रों पर अब भी जांच व इलाज का संकट है। अफसरों के तमाम दावे हवा-हवाई हैं। मरीज एक से दूसरे संस्थान धक्के खा रहे हैं। ऐसे में उनकी जान सांसत में पड़ रही है। स्टेमी प्रोग्राम के तहत लखनऊ के 26 अस्पतालों को शामिल किया गया है, ताकि हार्ट अटैक के मरीज को वक्त रहते इलाज मिल सके, मगर हकीकत इसके उलट है। शनिवार को अमर उजाला रिपोर्टर ने मरीज बनकर इसकी पड़ताल की तो जांच व इलाज का सच सामने आ गया।
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अलीगंज सीएचसी
समय- दोपहर एक बजे
रिपोर्टर : डॉक्टर साहब, दिल में दर्द हो रहा है
डॉक्टर : कब से दर्द उठ रहा है।
रिपोर्टर : पिछले तीन दिन से अक्सर दर्द उठ रहा है।
डॉक्टर : पहली मंजिल पर जाकर ईसीजी जांच करा लें।
इमरजेंसी कक्ष में स्टाफ से बातचीत
रिपोर्टर : डॉक्टर ने ईसीजी के लिए लिखा है, कराना है।
स्टाफ : अभी बाहर बैठे टेक्नीशियन को बुला रहे हैं।
रिपोर्टर : दिल में दर्द अधिक उठ रहा है, जल्द कराओ।
स्टाफ : टेक्नीशियन को फोन किया है, उनका फोन नहीं उठ रहा, थोड़ा इंतजार कर लें।
रिपोर्टर : करीब आधे घंटे बीत गए, जांच नहीं हो सकी।
डॉक्टर बोले, आप बीआरडी महानगर चले जाएं

अलीगंज सीएचसी में आधे घंटे बाद भी जांच न होने पर डॉक्टर के पास लौटकर आपबीती बताई। डॉक्टर ने पर्चे पर दो दवाएं लिखीं और कहा, यहां से दो किमी दूर बीआरडी महानगर है, आप वहां चले जाएं। वहां जाकर ईसीजी जांच कराकर भर्ती हो जाएं।
सीएचसी- रेडक्रॉस
समय - 12:11 मिनट
रिपोर्टर : डॉक्टर साहब दिल में अक्सर दर्द उठता है, आज भी हुआ है।
डॉक्टर- : यह परेशानी कब से है
रिपोर्टर : एक से दो माह से अक्सर होता है।
डॉक्टर : पहले तल पर बनी इमरजेंसी में जाकर बीपी-ईसीजी कराकर आएं।
रिपोर्टर : डॉक्टर ने ईसीजी लिखा है, क्या हो जाएगी।
स्टाफ : हां, हो जाएगी, बाहर बैठिए, अभी बुलाते हैं।
रिपोर्टर : 10 मिनट बीत गए जल्दी कीजिए।
स्टाफ : ओटी टेक्नीशियन को बुलाया है, दो मिनट में आ रहे।
रिपोर्टर : किस कक्ष में ईसीजी होगी
स्टाफ : आप बगल वाले कमरे में बैठ जाएं
रिपोर्टर : आप टेक्नीशियन है क्या?
टेक्नीशियन : हां, जांच के बाद रिपोर्ट हम केजीएमयू भेजते हैं, ईसीजी में गड़बड़ी आने पर इलाज देते हैं।
रिपोर्टर : ईसीजी ठीक आई है, एक बार नीचे डॉक्टर को दिखा लें।
30 मिनट में हुई ईसीजी, बीपी के लिए बाहर भेजा
रेडक्रॉस सीएचसी में ईसीजी जांच कराने में करीब 30 मिनट लग गए। ईसीजी के दौरान प्रयोग होने वाला लोशन भी खत्म हो गया था, जिसके बाद टेक्नीशियन लोशन लेने इमरजेंसी कक्ष में गए। बड़ी मुश्किल में यहां ईसीजी संभव हो सकी। डॉक्टर को ईसीजी दिखाया तो उन्होंने बीपी के लिए बाहर खुले हेल्थ एटीएम पर भेज दिया।
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Iस्टेमी प्रोग्राम के तहत सभी सीएचसी में जांच व इलाज की व्यवस्था है। दिल के रोगियों को लगने वाले इंजेक्शन भी सभी सीएचसी में हैं। मरीजों की जांच-इलाज में देरी होने के मामले में जवाब तलब किया जाएगा। I
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I- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओI
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