होटल लेवाना सुइट्स के दो मालिकों व महाप्रबंधक को मंगलवार को जेल भेज दिया गया है। इस होटल में सोमवार को आग लगने के कारण चार लोगों के मौत और सात लोगों के गंभीर रूप से घायल गये थे। करीब 22 लोगों को अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने निकाला था। एसएसआई हजरतगंज दयाशंकर द्विवेदी की तहरीर पर तीन मालिक व जीएम के खिलाफ लापरवाही व गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया था।
प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज अखिलेश मिश्रा के मुताबिक होटल लेवाना सुइट्स में सोमवार को आग लग गई थी। हादसे में चार की मौत हो गई। एसएसआई दयाशंकर द्विवेदी की तहरीर पर देर रात को केस दर्ज किया गया। इस मामले में तीन आरोपियों होटल के मालिक राहुल अग्रवाल, रोहित अग्रवाल और महाप्रबंधक सागर श्रीवास्तव को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया।
उन पर आरोप है कि होटल के मालिकों व महाप्रबंधक ने अग्निकांड से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किये थे। इमरजेंसी में निकलने व प्रवेश के लिए कोई इंतजाम नहीं था। बिजली व्यवस्था अनियमित थी। होटल में वैंटीलेशन का कोई प्रबंध नहीं था। असुरक्षित तरीके से रसोई गैस के सिलेंडर रखे गये थे। खिड़कियों के बाहर लोहे के रॉड लगाये गये थे। इसके कारण अग्निशमन कर्मचारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आरोप है कि होटल मालिक व प्रबंधक को मालूम था कि किसी इमरजेंसी में लोगों की जान जा सकती है। लेकिन इसके बचाव का कोई उपाय नहीं किया गया था। इसी लापरवाही के कारण सोमवार को अग्निकांड हुआ। जिसमें चार लोगों को जान गवानी पड़ी। वहीं सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गये।
देर रात तक हुई पूछताछ, दोपहर को भेजे गये जेल
पुलिस ने सोमवार देर शाम को ही होटल के दोनों मालिकों राहुल व रोहित अग्रवाल और महाप्रबंधक सागर श्रीवास्तव को हिरासत में ले लिया था। इन आरोपियों से देर रात तक पूछताछ चलती रही। वहीं देर रात को केस दर्ज किया। मंगलवार दोपहर को तीनों आरोपियों का चिकित्सकीय परीक्षण कराने के बाद कोर्ट में पेश किया। जहां से 14 दिन की रिमांड पर आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
एलडीए की ‘सेवा’ से बन गया लेवाना होटल
हजरतगंज के मदन मोहन मालवीय मार्ग स्थित होटल लेवाना का एलडीए ने नक्शा पास नहीं किया था। हालांकि, इसके इंजीनियरों और अफसरों की भरपूर ‘सेवा’ के चलते यह होटल अवैध तरीके से बन गया। एलडीए के अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 1996 में बंसल कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम से गुलमोहर अपार्टमेंट बनाने के लिए ग्रुप हाउसिंग का नक्शा पास कराया गया था।
कंपनी ने अपार्टमेंट के पास खाली जमीन छोड़ी थी, जिस पर ऑफिस बनना था। ग्रुप हाउसिंग बनने के बाद इसका इस्तेमाल वापस आवासीय करना था, लेकिन एलडीए इंजीनियरों-अधिकारियों की सांठगांठ से वर्ष 2017 में इसकी जगह होटल लेवाना शुरू हो गया। इसे बनवाने में एलडीए के इलाकाई तत्कालीन अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता एवं अवर अभियंता की सरपरस्ती रही।