आयुष्मान कार्ड धारक मरीज से रुपये लेने पर तिगुना जुर्माना वसूलने का आदेश है। राजधानी के दो अस्पतालों पर यह जुर्माना लग चुका है। नियम है कि यदि अस्पताल में किसी मरीज का इलाज चल रहा है और उसकी आगे के इलाज की सुविधाएं अस्पताल में नहीं हैं तो आसपास के नजदीकी अस्पताल में आयुष्मान के तहत केस स्थानांतरित किया जाए।
इलाज के नाम पर रुपये न लिए जाएं। इसके बाद भी बालागंज स्थित यूपी हॉस्पिटल ने मलिहाबाद की लड़की का इलाज दूसरे से कराने के नाम पर रुपये लिए थे। मामले की शिकायत होने पर जांच हुई और अस्पताल पर जुर्माना लगा। इसी तरह गोमतीनगर के आहूजा अस्पताल पर भी जुर्माना लगाया जा चुका है।
क्या कहते हैं सीएमओ
सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि अभी तक शिकायती पत्र मिला नहीं है। इलाज के नाम पर आयुष्मान कार्ड धारक से रुपये नहीं लिए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ है तो जांच कराई जाएगी। मामला सही पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाएगा। इससे पहले दो अस्पतालों पर जुर्माना लगाया जा चुका है।
आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाने में जन सुविधा केंद्रों की भागीदारी कम होने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जिला प्रबंधक को हटा दिया गया है। मालूम हो कि ‘अमर उजाला’ ने 27 सितंबर के अंक में गोल्डन कार्ड बनाने में जन सुविधा केंद्र लापरवाह शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
बताया था कि अभी तक जन सुविधा केंद्रों की भागीदारी सिर्फ 20 से 25 फीसदी है। अन्य जिलों में 80 फीसदी से ज्यादा कार्ड जन सुविधा केंद्रों ने ही बनाए हैं। राजधानी में करीब पांच सौ से अधिक जन सुविधा केंद्रों को यह जिम्मेदारी दी गई है। खबर छपने के बाद एडीएम ने जनसुविधा केंद्र के जिला प्रबंधक को हटा दिया है। उनके स्थान पर बनाए गए नए प्रबंधक और स्वास्थ्य विभाग के बीच बैठक हुई है।
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