संगीता करीब दो महीने पहले प्रेमी रहीम के साथ चली गई थी। पुलिस ने उसे चार दिन में खोज निकाला था और चौकी में दोनों पक्षों में समझौता करा दिया था। परिजन संगीता को लगातार रहीम से बात करने से मना कर रहे थे और उससे ताल्लुक खत्म करने के लिए धमका रहे थे, लेकिन वह रहीम से शादी करने की बात पर अड़ी थी। इस पर भाइयों ने तय किया कि उसे मार देंगे। ये बात खुद आरोपियों ने पूछताछ में कुबूल की है।
संगीता 10वीं की छात्रा थी। रहीम ने बात करने के लिए उसे एक के बाद एक तीन मोबाइल दिए थे। जैसे ही परिजनों को मोबाइल की जानकारी होती उसे छीनकर तोड़ देते थे। पुलिस जब संगीता को खोजकर लाई थी तो उसके कुछ दिन बाद ही उसके पास फिर एक मोबाइल मिला था। तब दुर्गेश और शंकर ने उसे जमकर पीटा था। दोनों ने पूछताछ में बताया कि बहन को बहुत समझाया, लेकिन वह कुछ भी मानने को तैयार नहीं थी। इससे बदनामी हो रही थी। इसलिए उसे मौत के घाट उतार दिया।
हत्या की थी जानकारी, फिर भी खामोश रहा परिवार
संगीता मां मिथिलेश और दोनों भाइयों दुर्गेश व शंकर के साथ रहती थी। अन्य चार भाई रोहन, गोविंद, सूरज व अतुल परिवार समेत पुराने मकान में रहते थे। संगीता के घर पर न पहुंचने पर सभी को ये पता तो चल ही गया था कि उसकी हत्या कर दी गई है, लेकिन पूरा परिवार खामोश रहा। अतरौली इंस्पेक्टर दिलेश कुमार सिंह का कहना है कि परिजनों की भूमिका की जांच की जा रही है। यदि किसी अन्य की संलिप्तता मिली तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।
हरदोई पुलिस की छह टीमों ने खुलासे के लिए काम किया। करीब 500 कैमरों की फुटेज खंगाली गई और 15 दिन की गहन तफ्तीश के बाद वारदात का खुलासा हुआ। ओमनी कार का नंबर मिल जाना पुलिस के लिए सबसे अहम व पुख्ता सुराग साबित हुआ। उसी आधार पर घटना का खुलासा हुआ। क्योंकि आरोपियों ने मोबाइल किए थे, लिहाजा उससे कोई सुराग नहीं मिल सका था।