लखनऊ। घुटना प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों के लिए खुशखबरी है। अब हाई फ्लैक्स इम्प्लांट लगवाने के बाद मरीज नमाज भी पढ़ सकेंगे और मंदिर में बैठकर पूजा भी कर सकेंगे। इस इम्प्लांट के लगाने पर पैर 130 से 140 डिग्री तक मुड़ सकता है। यह कहना केजीएमयू के आर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. शैलेंद्र सिंह का। वह शहर के एक होटल में आयोजित घुटना प्रत्यारोपण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में इस तकनीक से घुटना प्रत्यारोपण किया जा रहा है। इसकी कीमत भी 50 से 75 हजार है, जबकि पहले डेढ़ लाख रुपये खर्च होते थे। डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि पहले ज्यादातर लोग इस बात से डरते थे कि घुटना प्रत्यारोपण सफल होना मुश्किल है, लेकिन अब इसकी सफलता दर शत प्रतिशत हो गई है। हाई फ्लैक्स इम्प्लांट लगवाने से घुटना मुड़ सकता है। इस इम्प्लांट में कोबाल्ट, टाइटेनियम और ऑग्जीनियम का प्रयोग किया जाता है। इससे ग्रामीण इलाके के उन मरीजों को ज्यादा फायदा होगा तो कमोड वाले शौचालय का इस्तेमाल नहीं करते।
इस कार्यशाला के जरिये अन्य चिकित्सकों को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यशाला का उद्घाटन पीजीआई रोहतक के डॉ. राकेश गुप्ता और विभागाध्यक्ष डॉ. विनीत शर्मा ने किया। विभिन्न सत्रों में घुटना प्रत्यारोपण की नई तकनीक, प्रत्यारोपण के वक्त बरती जाने वाली सावधानियाें पर चर्चा की गई। इस दौरान डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. संदीप गर्ग, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. अनूप अग्रवाल, डॉ. उत्तम गर्ग डॉ. यूके जैन, डॉ. ओपी सिंह, डॉ. जीके सिंह, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. नरेंद्र कुशवाहा, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ अभिषेक अग्रवाल और डॉ. मयंक महेंद्रा ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में शामिल 35 चिकित्सकों को रविवार को केजीएमयू में कैडबर पर घुटना प्रत्यारोपण की तकनीक सीखाई जाएगी।
दवा खाने पर भी आराम न मिले तो हो जाएं सतर्क
घुटने में दर्द होने लगे और दवा खाने के बाद भी आराम न हो, टेढ़ा हो जाए, मुड़ने में दिक्कत हो, चटचट की आवाज आए तो तत्काल चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती दौर में कुछ एक्सरसाइज और दवाओं से घुटने में होने वाले संक्रमण व क्षति को रोका जा सकता है। घुटना प्रत्यारोपण से बचने के लिए सैर करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा साइकिलिंग से भी आराम होता है। इस स्थिति में सीढ़ी चढ़ने और उतरने से बचना चाहिए।
डॉ. शैलेंद्र सिंह, केजीएमयू
टेढ़े पैर वालों के लिए भी मिल रहे इम्प्लांट
अब टेढ़े पैर वालों के लिए भी इम्प्लांट आ गए हैं। ये सामान्य इम्प्लांट से काफी अलग हैं। इनकी कीमत में कोई ज्यादा अंतर नहीं ंहै। टेढ़े पैर वाले मरीजों में इम्प्लांट लगाते वक्त विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। हड्डी काटते वक्त जरा सी चूक आफत बन जाती है। इम्प्लांट लगाने के बाद मरीज को डॉक्टर की नियमित देखरेख में रहना जरूरी होता है। चिकित्सक की ओर से बताई गई एक्सरसाइज का असर इम्प्लांट की सफलता पर भी पड़ता है।
-डॉ. राकेश गुप्ता, पीजीआई, रोहतक
वजन कम करके बचा सकते हैं घुटने
घुटने की बीमारियों में वजन का सबसे ज्यादा महत्व होता है। जिन लोगों का वजन अधिक है, उनके घुटने जल्दी खराब होते हैं। इसलिए वजन कम करना जरूरी है। कुछ लोग कैल्शियम के लिए सिर्फ दूध लेते हैं। यह सिर्फ बच्चों के लिए फायदेमंद है। 20 साल से अधिक उम्र वालों को दूध के साथ ही दूसरे तत्व वाले पदार्थ भरपूर लेना चाहिए। कम खाएं लेकिन गुणवत्तापरक भोजन लेना चाहिए। बाजार के सामान खाने से परहेज करें।
डॉ. संतोष कुमार, केजीएमयू