लखनऊ। पैरों में सूजन हो, भूख कम लगे, पेशाब में झाग आए तो सावधान हो जाना चाहिए। यह किडनी की समस्या के प्राथमिक लक्षण हैं। यह कहना है केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित गुप्ता का। वह सोसायटी ऑफ रीनल न्यूट्रीशियन एवं मेटाबोलिज्म की दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि हर व्यक्ति को साल में एक बार पेशाब में प्रोटीन की मात्रा की जांच करा लेनी चाहिए। इसी तरह ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच कराना भी जरूरी होता है। इन तीन जांचों के आधार पर सेहत की निगरानी कर किडनी संबंधी बीमारियों को कम किया जा सकता है। इस कार्यशाला में नेफ्रोलॉजिस्ट, न्यूट्रीशियन और फिजिशियन संयुक्त रूप से मरीजों की सेहत सुरक्षा पर मंथन कर रहे हैं। विभिन्न स्थानों से आए करीब 220 चिकित्सक अपने-अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं। इस दौरान अलग-अलग सत्र में डाइट और उसके प्रभाव पर चर्चा की गई।
मरीज को प्रोटीन देना जरूरी
किडनी के काम नहीं करने पर उसका कुपोषण बढ़ जाता है। शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा तेजी से गिरने लगती है। इससे एनीमिया हो जाता है। इसी तरह मसल्स और हड्डी भी कमजोर हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में मरीज के खानपान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। उसके शरीर के लिए सभी पोषक तत्वों की जरूरत होती है। शरीर को प्रोटीन देना भी जरूरी होता है। मरीज के वजन के हिसाब से प्रति किलो .6 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। यदि डायलिसिस हो रही है तो प्रति किलो वजन पर 1.2 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। डायटीशियन की सलाह से डाइट चार्ट बनाकर मरीज को भोजन देना चाहिए।
- डॉ. अनिता सक्सेना, एसजीपीजीआई
पेस्टीसाइड कर रहे बच्चों को बीमार
खानपान में पेस्टीसाइडयुक्त चीजें बढ़ने की वजह से बच्चों में भी किडनी संबंधी बीमारियां पाई जा रही हैं। बच्चे की पेशाब की धार कमजोर हो तो एक बार चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इसी तरह पेशाब में लाल रंग का स्त्राव होने, बच्चे के पेशाब करते समय ज्यादा चीखने, उसके विभिन्न अंगों में सूजन होने पर चिकित्सक को दिखाना जरूरी होता है। यह छोटी सी लापरवाही बाद में किडनी रोग का बड़ा कारण बनती है। शुरुआत में इलाज करा देते से समस्या का समाधान हो जाता है।
- डॉ. नारायण प्रसाद, एसजीपीजीआई
पानी की शुद्धता जरूरी
किडनी मरीजों के लिए एक बड़ी वजह पानी है। पानी में आसेर्निक, लेड आदि तत्वों की अधिकता की वजह से किडनी के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में जहां रहें, उस इलाके के पानी की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए। सामान्य तौर पर माना जाता है कि सर्दी के मौसम में 1.5 लीटर से दो लीटर और गर्मी में 2 से 2.5 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। अधिक पानी पीते रहने से नुकसानदायक तत्व पेशाब के जरिए बाहर निकलते रहते हैं। आमतौर पर वयस्क व्यक्ति को दिनभर में करीब डेढ़ लीटर पेशाब करना जरूरी होता है।
- डॉ. मानस बेहरा, एसजीपीजीआई
मनमाने तरीके से न खाएं दवाएं
किडनी के खराब होने की बड़ी वजह मनमाने तरीके से दवाओं का प्रयोग भी है। हर व्यक्ति मेडिकल स्टोर से अपनी इच्छा के अनुसार दवाएं लेने से नहीं चूकता है। खासतौर से दर्द की दवाएं। ये दवाएं सीधे पर किडनी को प्रभावित करती हैं। कोई भी दवा लेने से पहले चिकित्सक की परामर्श जरूरी है। ग्रामीण इलाकेमें गरीबी की वजह से एक तरफ लोगों को भरपूर पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं तो दूसरी तरफ दवाएं, नशा आदि की समस्या है। यह किडनी को धीरे-धीरे प्रभावित कर देती है।
- डॉ. रवि कुशवाहा, एसजीपीजीआई
रिफाइंड चीजों का प्रयोग कतई न करें
किडनी के मरीजों के खानपान की विशेष निगरानी रखनी पड़ती है। किडनी संबंधी बीमारी होने अथवा डायलिसिस की स्थिति में परिजन पूरी तरह से प्रोटीन पर रोक लगा देते हैं। यह गलत है। उसे भरपूर पोषक तत्व देना जरूरी होता है। रिफाइंड वस्तुओं का प्रयोग न करें, वायु प्रदूषण से बचने का प्रयास करें। अनियमित जीवनशैली की वजह से 10 में से एक व्यक्ति किडनी का मरीज बन रहा है। देश में हर साल दो लाख नए मरीज आ रहे हैं, जबकि सिर्फ 1500 किडनी स्पेशलिस्ट हैं।
- डॉ. अनिल भल्ला, नई दिल्ली