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35 हजार बीएड विद्यार्थियों को राहत, हाईकोर्ट ने दिया छह हफ्ते में रिजल्ट जारी करने का आदेश

Tue, 04 Dec 2018 12:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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बीएड - फोटो : amar ujala
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शिक्षक बनने का सपना संजोकर साल 2013-14 में बीएड कोर्स में एडमिशन पाए उत्तर प्रदेश के करीब 35 हजार विद्यार्थियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सोमवार को बड़ी राहत दी है। उनके तीन साल से रुके हुए परिणाम छह हफ्ते में जारी करने के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों को आदेश दिए गए हैं। इन विद्यार्थियों के परिणाम सुप्रीम कोर्ट से बीएड विद्यार्थियों के एक अन्य मामले में आए निर्णय के आधार पर विभिन्न विश्वविद्यालयों ने रोक दिए थे।

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यह संयुक्त प्रवेश परीक्षा गोरखपुर विश्वविद्यालय ने आयोजित करवाई थी। इसके जरिए प्रदेश के विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बीएड कोर्स की 1.5 लाख सीटों पर एडमिशन दिए जाने थे।

एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने पर करीब 35 हजार सीटें खाली रह गईं। पूर्व घोषित प्रवेश प्रक्रिया के तहत बचे विद्यार्थियों को इनका आवंटन नहीं हुआ। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक शासनादेश जारी किया, जिसके तहत जो विद्यार्थी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए थे, उन्हें विभिन्न संस्थान अपने स्तर पर एडमिशन दे सकते थे। इस प्रकार ये 35 हजार सीटें भर दी गईं।

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यहां से उपजा विवाद

इस बीच मेरठ के डीएवी महाविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दी। इसमें कहा गया कि साल 2013-14 की प्रवेश परीक्षा में जो विद्यार्थी नहीं बैठे थे, लेकिन नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजूकेशन द्वारा निर्धारित योग्यताएं और गाइडलाइन पूरी करते हैं, उन्हें सीधे एडमिशन देने की अनुमति महाविद्यालय को मौजूदा सत्र में ही दी जाए।

नवंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी। इस आदेश में कहा गया कि 16 नवंबर 2013 के बाद किसी को भी एडमिशन देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस निर्णय के आधार पर विभिन्न विश्वविद्यालयों ने अपने यहां और अपने से संबद्ध महाविद्यालयों में सीधे एडमिशन पाए इन 35 हजार बीएड विद्यार्थियों के परिणामों पर ही रोक लगा दी।
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पढ़ाई कर चुके, परिणाम तो दो

इसके खिलाफ बीसियों विद्यार्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की। उनका कहना था कि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, अब उनके परिणाम जारी किए जाएं। उन्हाेंने डीएवी महाविद्यालय के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अपने से गैर-संबंधित बताया।

सरकार ने कहा, उसे आपत्ति नहीं
याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखा कि उसके ही शासनादेश पर 35 हजार विद्यार्थियों का एडमिशन हुआ था। उसे परिणाम जारी होने पर कोई आपत्ति नहीं है, न ही वह इसमें कोई बाधा देखती है।

निर्णय : सभी याचिकाएं मंजूर
मामले में अभ्यर्थियों के अधिवक्ता रजत राजन सिंह के अनुसार जस्टिस विवेक चौधरी ने निर्णय में कहा कि सभी याचिकाएं मंजूर की जाती हैं। संबंधित विश्वविद्यालय छह हफ्ते में परिणाम जारी करें। साथ ही कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश दूसरे महाविद्यालय और मामले से संबंधित था। चूंकि सरकार को भी कोई आपत्ति नहीं है, ऐसे में परिणाम जारी किए जाने चाहिए।
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