याची ने दलील दी कि ये सभी सिर्फ विधायक हैं, लिहाजा नियमानुसार टाइप छह के ये बंगले इन्हें नहीं आवंटित किए जा सकते। याचिका में इन सभी बंगलों के आवंटन को रद्द करने की मांग की गई है। याची ने हाईकोर्ट से बंगलों के आवंटन में नियमों का पूर्ण पालन कराने की गुजारिश की है।
इससे पहले अदालत ने सरकारी वकील को याचिका पर पक्ष पेश करने के लिए राज्य सरकार से निर्देश लेने को हफ्ते भर का समय दिया था। लेकिन सरकारी वकील ने जवाब देने के लिए अदालत से और समय मांगा है। याचिका में राज्य सरकार के जरिए राज्य संपत्ति विभाग के प्रमुख सचिव, राज्य संपत्ति अधिकारी समेत चारों विधायकों को पक्षकार बनाया गया है।