इसे लेकर कोर्ट ने डीएम समेत राज्य महिला आयोग की सचिव से जवाब तलब किया था। अदालत ने दोनों को निर्देश दिया था कि विस्तृत हलफनामा दाखिल कर बताएं कि क्या पीड़िता को कोई मुआवजा दिया गया या नहीं।
पीड़िता को भी यह जिक्र करते हुए हलफनामा पेश करने को कहा था कि उसे कोई मुआवजा मिला या नहीं। इससे पहले अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने कोर्ट को बताया था कि इस याचिका के लंबित रहने के दौरान 18 अप्रैल 2016 को सत्र अदालत ने मामले के आरोपियों को सजा सुनाते हुए पीड़िता को दो लाख रुपये बतौर मुआवजा देने को कहा था।
डीएम ने जवाबी हलफनामे में कहा कि पीड़िता को अभी तक उक्त मुआवजा नहीं मिला है। इसकी प्रक्रिया चल रही है और उसे जल्द भुगतान कर दिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने उक्त निर्देश देकर याचिका निस्तारित कर दी।