हर घर नल योजना आर्सेनिक, फ्लोराइड, खारे पानी व जापानी इंसेफेलाइटिस प्रभावित सभी जिलों लागू होने वाली है। पहले चरण में बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में इस योजना को लागू कर दिया है। इस वर्ष के अंत तक 50 हजार राजस्व गांवों तक इस योजना को ले जाने का लक्ष्य है। लेकिन हर घर तक नल और पेयजल साथ ही प्रत्येक नागरिक जिम्मेदारी होगी कि दिन भर नल का पानी खुला छोड़ कर न रखें। घर के बेकार पानी को कैसे दोबारा इस्तेमाल करें। हर नागरिक को जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित भूजल सप्ताह के समापन समारोह में मौजूद लोगों से यह बातें कही।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समापन समारोह में मौजूद पांच लोगों ने जल संरक्षण के क्षेत्र में कुछ नया करके दिखाया है। लेकिन यह कार्य 24 करोड़ की आबादी में हर व्यक्ति कर सकता है। हर घर नल योजना को प्रदेश की 58 हजार ग्राम पंचायतों, एक लाख राजस्व गांवों और 14000 नगर निकाय के वार्ड तक योजना को पहुंचाएंगे। उम्मीद है यह कार्यक्रम प्रत्येक नागरिक को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने और एक एक बूंद जल को संरक्षित करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि यूपी में भी बीते साल 20 साल में भूगर्भ जल की रिपोर्ट डरावनी थी। प्रदेश के 287 विकास खंडों में प्रतिवर्ष 20 सेंटीमीटर और 77 विकास खंडों में एक मीटर तक भूजल स्तर में गिरावट मिली थी। लेकिन पिछले चार-पांच साल में भूगर्भ जल के क्रिटिकल इलाकों को सेमी क्रिटिकल में पहुंचाया गया है। डार्क जोन को सुधारने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को कानून बनाकर लागू किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल की कीमत क्या है उत्तर प्रदेशवासी हो सकता है न समझे। लेकिन जल की कीमत क्या है वह कार्यक्रम में मौजूद जल पुरुष राजेंद्र सिंह जानते हैं। राजस्थान के जैसलमेर में सबसे कम वर्षा होती है। वहां के लोगों ने 500-700 साल पहले वर्षा की एक-एक बूंद की कैसे संरक्षा की जा सकती है करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 2019 में प्रधानमंत्री ने अटल भूजल योजना की शुरुआत की थी। इसमें 10 जिलों का चयन किया गया था लेकिन इस योजना से सभी 75 और 826 विकास खंड को जोड़ा गया। इस योजना को एक साथ लागू करने का जो कार्यक्रम बना था, उसके सार्थक परिणाम मिले हैं।
उन्होंने कहा कि चित्रकूट और वाराणसी में जल संरक्षण के विशेष मॉडल देखने को मिले हैं। वाराणसी मॉडल में बेकार पड़े हैंड पंप से वर्षा जल के संचय मॉडल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि फ्लोराइड और आर्सेनिक से प्रभावित जिलों में भूगर्भीय जल के दोहन से स्थितियां बिगड़ी हैं। यदि वर्षा जल संरक्षण की बेहतर तकनीक को अपनाएंगे तो खारे पानी, आर्सेनिक और फ्लोराइड की दिक्कत को भी दूर किया जा सकेगा। हर घर को शुद्ध जल मिलेगा तो आधे से अधिक बीमारी दूर हो जाएगी। उन्होंने जीवन पद्धति को बदलकर जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारी के नियंत्रण के मॉडल की जानकारी भी इस मौके पर दी। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर जल संसाधन आंकलन रिपोर्ट पुस्तिका का विमोचन किया। जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने प्रदेश में भूगर्भ जल की सुधरती स्थति और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता की जानकारी दी।
जैविक खेती से किसानों को जोड़ा गया
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसानों को जैविक खेती से भी जोड़ा गया है। उन्हें बताया गया कि खेत की मेड़ पर फलदार वृक्ष लगाएं। बिना रसायनिक खाद के खेती करें। ऐसे किसानों को तीन साल के लिए जोड़ा है। यह भी तय किया है कि गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में वृक्षा रोपण औपचारिकता न बने। खासतौर से छायादार, फलदार और इमारती लकड़ियों के पेड़ लगें। इसीलिए ल्यूकलिप्टस और पापुलकर को वृक्षारोपण योजना से हटा दिया गया है। राजकीय नर्सरी में 35 करोड़ पौधे तैयार करके बांटे गए हैं। उनके संरक्षण फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट को नामित किया गया है। सर्वे व वृक्षारोपण के रिकार्ड की व्यवस्था की गई। इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं।