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Lucknow News: भाषा विवि में होगी गुजराती, बांग्ला, मराठी, पंजाबी व तमिल की पढ़ाई

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लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में अगले सत्र से गुजराती, बांग्ला, मराठी, पंजाबी और तमिल भाषाओं की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। विवि के कुलपति प्रो. एनबी सिंह ने रविवार को दीक्षांत समारोह की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी।
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कुलपति ने बताया कि भाषा विवि को सही मायने में भाषाओं का विश्वविद्यालय बनाना है। इसके लिए विवि में भारतीय भाषा विभाग की स्थापना की जाएगी। इसमें सभी भारतीय भाषाओं की पढ़ाई होगी। साथ ही वाणिज्य विभाग में चार वर्षीय पाठ्यक्रम और 10 सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम भी शुरू होंगे। विवि को समाज से जोड़ने के लिए अगले साल से लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से आसपास के गांवों में लोगों को निशुल्क कानूनी सलाह दी जाएगी। हिंद मेडिकल कॉलेज के साथ कम्युनिटी क्लीनिक भी अगले साल से प्रस्तावित है। इस मौके पर डॉ. रुचिता सुजॉय चौधरी, डॉ. शचींद्र शेखर और डॉ. काजिम रिजवी मौजूद रहे।

विवि में पहली बार दो हजार से ज्यादा दाखिले
कुलपति ने बताया कि इस साल विवि में रिकॉर्ड 2099 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में सभी सीटें भर चुकी हैं। परंपरागत पाठ्यक्रमों में भी इस साल दाखिलों की संख्या अच्छी रही है।
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भाषा और लोक संस्कृति के लिए काम करेगी अवधी शोधपीठ
प्रो. एनबी सिंह ने बताया कि विवि में अगले सत्र से अवधी शोधपीठ की स्थापना की जाएगी। यहां अवध क्षेत्र की लोक संस्कृति और भाषा विकास के लिए काम किया जाएगा। विवि अभी तक 40 पॉलिसी और 54 एमओयू हस्ताक्षरित कर चुका है जिसमें दो अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं।

नौवां दीक्षांत समारोह आज, हुआ पूर्वाभ्यास
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय का नौवां दीक्षांत समारोह सोमवार को होगा। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के साथ ही सीपेट के डॉयरेक्टर जनरल प्रो. शिशिर सिन्हा मुख्य अतिथि होंगे। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि होंगी। समारोह में सत्र 2023–24 के लिए कुल 149 पदक दिए जाने हैं। इनमें से तीन प्रायोजित हैं।
विवि के अटल हॉल में रविवार को दीक्षांत समारोह का पूर्व अभ्यास किया गया। मुख्य अतिथि सीपेट के डॉयरेक्टर जनरल प्रो. शिशिर सिन्हा ने स्वदेशी अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा, तकनीक को स्वावलंबन के साथ विकसित करना जरूरी है। प्रो. सिन्हा ने विद्यार्थियों से बातचीत कर उनके सवालों के जवाब दिए। राज्यपाल की भूमिका में प्रो. चदंना, उच्च शिक्षा मंत्री की भूमिका में प्रो. मसूद आलम, कुलपति की भूमिका में प्रो. नरेंद्र बहादुर सिंह आदि शामिल हुए।
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