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वाराणसी मंडल की रिपोर्ट: जिसने जीता दिल, उसने जीती काशी, पर बाकी जिलों की काशी जैसी नहीं रही किस्मत

Wed, 08 Dec 2021 10:45 AM IST
ishwar ashish सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ

सार

2014 में ‘मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है’पीएम मोदी के इस बयान पर काशी फिदा हो गई थी। हालांकि, साढ़े सात साल बाद काशी की हालत तो बदली पर मंडल के अन्य जिले अभी विकास से दूर हैं।
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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर।
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विस्तार
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जिसने काशी का दिल जीता, काशी उसी की हो गई। बाबा विश्वनाथ की नगरी ऐसी ही निराली है। ‘मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है’, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान पर काशी फिदा हो गई थी। काशी के घाटों पर उनके फावड़ा लेकर उतरने का दृश्य तो याद ही होगा। काशी को क्योटो बनाने के दावे के साथ यहां से सांसद बने पीएम नरेंद्र मोदी के कई काम अब सुर्खियों में हैं। वाराणसी और उसके आसपास सड़कों का जाल फैला हुआ है। फ्लाईओवर भी राह आसान कर रहे हैं। तो वहीं, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर देश ही नहीं दुनिया में चर्चा का विषय है।

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इन सबके साथ अगर चुनावी परिदृश्य की बात करें तो काशी जितनी सरल है...। सहज है...।  यहां का चुनावी मैदान उतना सरल और सहज नहीं है। यह सबका इम्तिहान लेती है। अब बात यहां के सियासी मिजाज की। राम जन्मभूमि आंदोलन ने प्रदेश और देश के अन्य भागों की तरह इस नगरी के भी राजनीतिक मिजाज को बदला। पर, इसकी रफ्तार बढ़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ने और इसे केंद्र बनाकर पूर्वांचल के विकास पर फोकस करने की रणनीति से। इसी का नतीजा रहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में वाराणसी जिले की आठ सीटें भाजपा व उसके सहयोगियों ने जीत लीं।

मंडल की 18 सीटों पर भाजपा
मंडल की बात करें तो यहां विधानसभा की 28 सीटें हैं। इनमें से 16 पर भाजपा का परचम फहरा रहा है तो दो सीटों पर उसके सहयोगी अपना दल (एस) का। भाजपा के पास वाराणसी जिले की 6, जौनपुर जिले की 4, गाजीपुर जिले की तीन और चंदौली की तीन सीटें हैं। जबकि वाराणसी की सेवापुरी और जौनपुर की मडि़याहूं सीट सहयोगी अपना दल (एस) के पास है।
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गाजीपुर की दो और वाराणसी की एक सीट पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) का कब्जा है। वहीं, जौनपुर की तीन, गाजीपुर की दो और चंदौली की एक सीट मिलाकर सपा के पास कुल 6 सीटें हैं और बसपा के पास सिर्फ मुंगरा बादशाहपुर की एक सीट है। सीटों के गणित से साफ है कि भाजपा और सपा के सामने अपनी सफलता को और विस्तार देने की चुनौती है। तो वहीं, बसपा और कांग्रेस के पास यहां कामयाबी की इबारत लिखने के मौके हैं।

नहीं बसाया जा सका उपनगर: नई काशी बसाने का प्रयास तो हुआ पर...

सियासी मिजाज के बाद अब चर्चा उन चुनावी मुद्दों की जो सबका इम्तिहान लेंगे। चुनावी चर्चा छिड़ते ही लंका निवासी श्रीराम सिंह पप्पू कहते हैं, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक पर्यटन के लिए वाराणसी में हर साल लाखों लोग आते हैं। पर, शहर के विस्तार का खाका नहीं खींचा गया। एक बार नई काशी बसाने का प्रयास तो हुआ, लेकिन सियासी लोगों ने रोड़ा अटका दिया। पर, इसको लेकर चुनाव में सवाल तो उठेंगे ही। उपनगर बसाने का प्रयास तो होना ही चाहिए।

काम तो हुए...जाम अब भी समस्या
वाराणसी के लोहता के रहने वाले असद कमाल लारी कहते हैं, विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर और कैंसर के इलाज के लिए भाभा ग्रुप से मिलकर बीएचयू में कैंसर अस्पताल खोलने जैसे उल्लेखनीय काम हुए हैं। पर, यातायात व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। आज भी लोगों को घंटों जाम से जूझना पड़ रहा है। बुनकरों की समस्या, शहरी क्षेत्र की खराब सड़कें, प्रदूषित पेयजल जैसे मुद्दे जनप्रतिनिधियों का इम्तिहान लेंगे।

अधूरी ही रह गई विकास की आस
जिले के सियासी मिजाज की बात करें तो शुरुआत में यहां के लोगों का कांग्रेस पर विश्वास रहा लेकिन बाद में भाकपा का प्रभाव बढ़ा। सरजू पांडेय और रघुबीर राम सरीखे नेताओं की वजह से यहां भाकपा जीतती रही। भाकपा से ही राजनीति की शुरुआत करने वाले अफजाल अंसारी व मुख्तार के परिवार के लोग भी कई बार चुने गए। भाजपा से मनोज सिन्हा, कृष्णानंद राय और सपा से ओमप्रकाश सिंह सरीखे नेताओं ने भी अपनी-अपनी पार्टियों का रसूख बढ़ाया। बहरहाल, सैदपुर से विधायक सुभास पासी अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

रेवतीपुर निवासी राजकमल राय बताते हैं, संसद में पूर्वांचल की गरीबी और गोबर से अनाज निकालकर खाने का मुद्दा उठाकर तहलका मचाने वाले विश्वनाथ गहमरी समेत तमाम बड़े नेता यहां हुए, लेकिन जिले का विकास आज भी बड़ा मुद्दा है। नंदगंज चीनी मिल और बहादुरपुर की कताई मिल भी बंद पड़ी है।

वादे तो बहुत हुए, जमीन पर नहीं उतरे

बसपा सरकार में 1997 में वाराणसी को बांटकर चंदौली जिला बना। जिला बनने के करीब 20 साल बाद यहां जिला मुख्यालय का भवन बना। पर, पुलिस लाइन और एसपी कार्यालय आज तक नहीं है। राजदरी व देवदरी जैसे जल प्रपात और नौगढ़ होने के बाद भी इसका पर्यटन केंद्र के रूप में विकास नहीं हो सका। अलबत्ता भाजपा सरकार ने जिले बरठी में एक मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास करके जनता में आस जरूर जगाई है।

पेशे से चिकित्सक डॉ. धनंजय सिंह कहते हैं, कोई गंभीर बीमारी होने पर आज भी लोगों को वाराणसी भागना पड़ता है। गंगा की कटान से होने वाली समस्या, सिंचाई सुविधाओं का अभाव भी प्रमुख मुद्दे हैं। बिहार बॉर्डर से सटे होने के बाद भी यहां की सड़कों की हालत बदतर है।

नाम के लिए सिर्फ एक विश्वविद्यालय
लंबे समय तक इस जिले में कांग्रेस का दबदबा रहा। बाद में सपा और बसपा को भी भरपूर मौका मिला। बहरहाल, अब राजनीतिक हालात बदल गए हैैं। बसपा से चुनाव जीतने वाली मौजूदा विधायक सुषमा पटेल सपा में शामिल हो चुकी हैं। समाज सेवा से जुड़े नहोरा निवासी राम प्रकाश कहते हैं कि आजादी के बाद सिर्फ वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ही एक ऐसी उपलब्धि है, जिसका नाम लिया जा सकता है।

औद्योगिक विकास में भी इस जिले की अनदेखी हुई। सतहरिया औद्योगिक क्षेत्र बदहाल हो चुका है। अधिकांश कल-कारखाने बंद हो चुके हैं। हर चुनाव में नदियों पर पुल बनाने का वादा होता है, पर पूरा नहीं होता। यह सब चुनावी मुद्दे बनेंगे।

सीटों का गणित: वाराणसी (कुल 8 सीटें)

वाराणसी कैंट : भाजपा के सौरभ श्रीवास्तव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 70 हजार, मुस्लिम 60 हजार, अनुसूचित जातियां 30 हजार, यादव 20 हजार, वैश्य व कायस्थ 15-15 हजार, क्षत्रिय व भूमिहार 10-10 हजार।

शहर उत्तरी :  राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल इस सीट से लगातार दूसरी बार विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : क्षत्रिय व मुस्लिम करीब 70-70 हजार, वैश्य 40 हजार, यादव 30 हजार, कायस्थ, पटेल व अनुसूचित जातियां 15-15 हजार, ब्राह्मण, सोनकर व राजभर 20-20 हजार।

शहर दक्षिणी : पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नीलकंठ तिवारी इस सीट से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1 लाख, ब्राह्मण 25 हजार, यादव व अनुसूचित जातियां 20-20 हजार, वैश्य 15 हजार, अन्य जातियों के साथ ही गुजराती भी 10 हजार।

रोहनिया : भाजपा के सुरेंद्र नारायण सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : पटेल करीब 70 हजार, राजभर 40 हजार, अनुसूचित जातियां 30 हजार, भूमिहार 25 हजार, मुस्लिम 22 हजार, मौर्य व यादव 20-20 हजार, ब्राह्मण 5 हजार।

सेवापुरी : अपना दल से नीलरतन पटेल विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : भूमिहार करीब 35 हजार, ब्राह्मण व अनुसूचित जातियां 30-30 हजार, यादव व मुस्लिम 25-25 हजार, क्षत्रिय व राजभर 20-20 हजार, बिंद10 हजार।

शिवपुर : पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री अनिल राजभर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव व अनुसूचित जातियां करीब 60-60 हजार, राजभर-40 हजार, ब्राह्मण 32 हजार, वैश्य, मौर्य, पटेल व मुस्लिम 25-25 हजार, क्षत्रिय व निषाद 15-15 हजार।

पिंडरा : भाजपा के अवधेश सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : पटेल करीब 80 हजार, ब्राह्मण 60 हजार, अनुसूचित जातियां 50 हजार, भूमिहार 30 हजार, राजभर व मौर्य 25-25 हजार, वैश्य व मुस्लिम 20-20 हजार।

अजगरा (सुरक्षित) :  सुभासपा के कैलाश सोनकर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव व अनुसूचित जातियां करीब 60-60 हजार, ब्राह्मण 50 हजार, राजभर व पटेल 30-30 हजार,  क्षत्रिय व मुस्लिम 20-20 हजार, मौर्य व वैश्य 15-15 हजार।

जौनपुर (9 सीटें)
शाहगंज : सपा के ललई यादव यहां से लगातार दूसरी बार विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव 61 हजार, अनुसूचित जातियां 50 हजार, क्षत्रिय 40 हजार, बिंद 35 हजार, राजभर 33 हजार, मुस्लिम 30 हजार, ब्राह्मण 28 हजार, मौर्य व चौहान 13-13 हजार, पाल 10 हजार।

मछलीशहर (सु.) : पूर्व मंत्री जगदीश सोनकर सपा से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 61 हजार, यादव 60 हजार, ब्राह्मण 50 हजार, मुस्लिम 31 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, बिंद 22 हजार, वैश्य व मौर्य 17-17 हजार, पटेल 13 हजार, प्रजापति 10 हजार।

जौनपुर सदर : मंत्री गिरीश चंद्र यादव यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 90 हजार, अनुसूचित जातियां 50 हजार, वैश्य 40 हजार, मौर्य 37 हजार, यादव 33 हजार,  बिंद 29 हजार, क्षत्रिय व राजभर 26-26 हजार, ब्राह्मण 22 हजार।

बदलापुर : भाजपा के रमेशचंद्र मिश्रा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण 70 हजार, यादव 55 हजार, अनुसूचित जातियां 50 हजार, क्षत्रिय 30 हजार, मौर्य, बिंद 18 हजार, वैश्य व मुस्लिम 17-17 हजार, चौहान 14 हजार।

मड़ियाहूं : अपना दल (एस) की लीना तिवारी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : पटेल करीब 55 हजार, ब्राह्मण व यादव 45-45 हजार, अनुसूचित जातियां 40 हजार, क्षत्रिय व मुस्लिम 30-30 हजार, मौर्य 10 हजार।

जफराबाद : भाजपा के हरेंद्र प्रसाद सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 68 हजार, ब्राह्मण 45 हजार, यादव 42 हजार, क्षत्रिय 37 हजार, पटेल 34 हजार, मुस्लिम 26 हजार, बिंद 25 हजार, राजभर 21 हजार, मौर्य 16 हजार, वैश्य व पाल 13-13 हजार।

मुंगरा बादशाहपुर : बसपा की सुषमा पटेल विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 80 हजार, अनुसूचित जातियां 65 हजार, पटेल 60 हजार, यादव 40 हजार, क्षत्रिय 30 हजार, वैश्य 26 हजार,  मुस्लिम 20 हजार, चौहान 15 हजार।

मल्हनी : सपा के दिग्गज नेता पारसनाथ यादव के निधन से रिक्त हुई इस सीट पर 2020 में हुए मध्यावधि चुनाव में उनके पुत्र लकी यादव विधायक बने।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 90 हजार, अनुसूचित जातियां 60 हजार, क्षत्रिय 45 हजार, ब्राह्मण 35 हजार, क्षत्रिय 45 हजार, मुस्लिम 24 हजार, वैश्य व मौर्य 10-10 हजार।

केराकत : भाजपा के दिनेश चौधरी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 1 लाख, यादव 50 हजार, क्षत्रिय 36 हजार, बिंद 35 हजार, ब्राह्मण व वैश्य 23-23 हजार, मुस्लिम 22 हजार, राजभर 19 हजार, मौर्य 18 हजार, चौहान 17 हजार, भूमिहार 13 हजार।
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गाजीपुर (कुल 7 सीट)

मुहम्मदाबाद : पूर्व विधायक स्व. कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय भाजपा से विधायक हैं। मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिगबतुल्लाह अंसारी को हराकर इस सीट को वापस लिया है।
जातिगत समीकरण : भूमिहार करीब 1 लाख, अनुसूचित जाति 85 हजार, यादव 48 हजार, कुशवाहा 25 हजार, राजभर 7 हजार, क्षत्रिय 6 हजार।

सैदपुर (सुरक्षित) : सपा के सुभाष पासी जीते थे, लेकिन अब वह भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां 75 हजार, यादव 70 हजार, राजभर 33 हजार, मुस्लिम 26 हजार, कुशवाहा 22 हजार, क्षत्रिय 19 हजार, वैश्य 18 हजार, ब्राम्हण 17 हजार, चौहान 12 हजार, बिंद 11 हजार, पासी 10 हजार।

जमानिया : इस सीट से भाजपा की सुनीता सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां व मुस्लिम करीब 50-50 हजार, यादव व कुशवाहा 40-40 हजार, क्षत्रिय 30 हजार, ब्राह्मण 25 हजार।

जंगीपुर : सपा के डॉ. वीरेंद्र यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 54 हजार, अनुसूचित जातियां 52 हजार, क्षत्रिय 47 हजार, वैश्य 20 हजार, राजभर 16 हजार, भूमिहार व मुस्लिम 12-12 हजार।

जखनिया : सुभासपा के त्रिवेणी राम विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 91 हजार, यादव 68 हजार, राजभर 48 हजार, चौहान 36 हजार, कुशवाहा 31 हजार, वैश्य 22 हजार, मुस्लिम 18 हजार, क्षत्रिय 16 हजार, ब्राह्मण 14 हजार।

गाजीपुर सदर : भाजपा की डॉ. संगीता बलवंत विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : बिंद 38 हजार, वैश्य 37 हजार, यादव 35 हजार, मुस्लिम व अनुसूचित जातियां 32-32 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, कुशवाहा व कायस्थ 23-23 हजार, भूमिहार 18 हजार, ब्राह्मण 17 हजार।

जहूराबाद :  सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 75 हजार, राजभर 66 हजार, यादव 43 हजार, चौहान 33 हजार, मुस्लिम 27 हजार, राजपूत 22 हजार, वैश्य 15 हजार, ब्राह्मण 14 हजार, भूमिहार 11 हजार, कुशवाहा 10 हजार।

चंदौली (कुल सीट-4)
मुगलसराय : भाजपा की साधना सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ओबीसी व मुस्लिम करीब 80-80 हजार, अनुसूचित जातियां 60 हजार, ब्राह्मण 35 हजार, क्षत्रिय 32 हजार व वैश्य 22 हजार।

सकलडीहा : सपा के प्रभुनारायण यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : यादव करीब 72 हजार, अनुसूचित जातियां 50 हजार, राजभर 31 हजार, ब्राह्मण 27 हजार, क्षत्रिय 18 हजार, चौहान 17 हजार, वैश्य 12 हजार।

सैयदराजा : भाजपा के सुशील सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 65 हजार, क्षत्रिय 40 हजार, बिंद 35 हजार, मुस्लिम 27 हजार, ब्राह्मण, वैश्य व यादव 25-25 हजार, कुशवाहा 20 हजार, राजभर व निषाद 12-12 हजार।

चकिया (सु.) : भाजपा के शारदा प्रसाद विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 68 हजार, यादव 52 हजार, मुस्लिम 32 हजार, ब्राह्मण 30 हजार, कुशवाहा 28 हजार, वनवासी व वैश्य 25-25 हजार।
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