राज्यपाल राम नाईक ने यूपी सरकार द्वारा प्रस्तावित लोकायुक्त के नाम को कारण बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने सरकार से नया नाम मांगा है।
राज्यपाल ने पूर्व न्यायमूर्ति रविंद्र सिंह को लोकायुक्त बनाने के विचार को खारिज करते हुए सरकार से नया नाम मांगा है। राज्यपाल ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया है कि किन वजहों से रविंद्र सिंह की नियुक्ति लोकपाल के लिए नहीं हो सकती।
राज्यपाल ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि सरकार चयन समिति के सदस्यों के साथ जल्द से जल्द परामर्श कर किसी अन्य उपयुक्त नाम की सिफारिश करे।
इस बाबत उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य को 17 पन्ने का लंबा चौड़ा पत्र भी भेजा है। इससे राजभवन और सरकार के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। प्रदेश में यह पहला मौका है जब किसी लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर इतना बखेड़ा खड़ा हुआ है।
सरकार ने अड़ियल रुख दिखाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रविंद्र सिंह को लोकायुक्त बनाने के लिए 21 अगस्त को चौथी बार फाइल भेजी थी।
आखिरकार राज्यपाल ने उनके नाम को खारिज कर उ.प्र. लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम 1975 के प्रावधानों के तहत निर्धारित प्रक्रिया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए नया नाम तय करके भेजने को कहा है। नाईक ने जस्टिस रविंद्र सिंह का नाम खारिज करने के कारण भी गिनाए हैं।
गर्वनर ने बताए ये चार कारण
*राज्यपाल ने अपनी आपत्तियों में कहा है कि चयन समिति के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श कर लोकायुक्त का नाम आम सहमति से तय करने की कानूनी औपचारिकता पूरी नहीं की। नियमत: मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और नेता प्रतिपक्ष को बैठक कर नाम तय करना चाहिए। इसके बाद ही नियुक्ति के लिए सिफारिश भेजी जानी चाहिए।
*राज्यपाल ने नेता प्रतिपक्ष का हवाला देते हुए कहा है कि उनके अनुसार चयन समिति के तीनों सदस्यों ने एक साथ बैठकर या विचार-विमर्श से एक नाम पर सहमति प्रदान नहीं की है। सदस्यों को इस तथ्य की जानकारी भी नहीं है कि तीनों सदस्यों के बीच क्या पत्राचार या विचार-विमर्श हुआ है।
*गवर्नर ने चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ द्वारा जस्टिस रविंद्र के बारे में दी गई राय का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा था कि सरकार से नजदीकियों के कारण उनका कार्य प्रभावित हो सकता है। निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए जस्टिस रविंद्र का नाम उपयुक्त नहीं होगा।
*राम नाईक ने स्पष्ट कहा कि लोकायुक्त की नियुक्ति के संबंधि में कैबिनेट की बैठक में किए गए निर्णय को मानने के लिए राज्यपाल बाध्य नहीं हैं। लोकायुक्त का चयन एक निर्धारित प्रक्रिया है। इसमें कैबिनेट की कोई भूमिका नहीं होती है।