उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भले ही अपने राज्य में कानून का राज बताते हों, लेकिन यहां गुंडागर्दी का आलम कम होता नहीं दिख रहा है।
इसकी तस्दीक कर रही हैं मारपीट की दो घटनाएं, जो राजधानी के बीचोंबीच बनी लखनऊ यूनिवर्सिटी में दिनदहाड़े हुई हैं।
इससे यह भी साफ हो गया है कि लखनऊ यूनिवर्सिटी जैसी जगह पर भी छात्राएं सुरक्षित नहीं रह गई हैं।
पुलिस तैनात, पर शोहदों का राज
पहला मामला है दोपहर करीब एक बजे एलयू के परिसर में स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का। यहां किसी काम से बीए सेकंड ईयर की एक छात्रा अपने एक मित्र के साथ गई थी।
यहां कुछ शोहदों ने कमेंट करने शुरू कर दिए। इस पर छात्रा के दोस्त ने विरोध किया, तो उससे गाली गलौंच करने लगे।
इतने पर भी मन नहीं भरा, तो उसकी जमकर पिटाई करने लगे। जब वहां भीड़ जमा हुई, तो गुंडई करने वाले लड़के वहां से भाग निकले।
यहां वर्चस्व की लड़ाई
दूसरा मामला भी परिसर के मुख्य द्वार के पास का ही। यह बताना इसलिए जरूरी है कि यहां हमेशा कुछ पुलिस के लोग मौजूद रहते हैं। परीक्षा भवन के ठीक सामने बीए फर्स्ट ईयर के छात्र को एनडी हॉस्टल के चार छात्रों ने बुरी तरह पीटा।
बताया जा रहा है कि छात्र परीक्षा भवन किसी काम से गया था कि पीछे से ये चार छात्र भी पहुंच गए। पहले छात्र को उकसाने की कोशिश की और जब उसने वहां से भागने की कोशिश की, तो उसकी धुनाई करने लगे।
इसीलिए होने चाहिए छात्रसंघ चुनाव?
बीते दिनों अखिलेश जिस छात्रसंघ चुनाव की वकालत कर रहे थे, उसकी असलियत पहले ही नजर आने लगी है। यहां बिना छात्र राजनीति के लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं, चुनाव हुए तो क्या दशा होगी, इसकी कल्पना की जा सकती है।