चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे में सीआरएस प्रणजीव सक्सेना ने रविवार को लखनऊ में लोको पायलट, गार्ड, कीमैन, स्टेशन मास्टर, बाबुओं सहित 50 लोगों के बयान दर्ज किए। रूलबुक के अनुसार यह भी देखा कि लोको पायलट ने ट्रेन की स्पीड मानकों के अनुरूप रखी या नहीं।
एसएसई, गार्ड, स्टेशन मास्टर ने रेलवे बोर्ड द्वारा तय गाइडलाइन का कितना पालन किया। गोंडा-गोरखपुर रूट पर मोतीगंज-झिलाही स्टेशन के बीच चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी। हादसे में चार यात्रियों की मौत हुई थी और 33 घायल हुए थे।
मामले में रेलवे की संयुक्त जांच हो चुकी है। रविवार को रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने हजरतगंज स्थित पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम दफ्तर सभागार में बयान दर्ज किए।
इस दौरान उनके समक्ष कैरिज एंड वैगन (सीएनडब्ल्यू), इंजीनियरिंग, सिग्नल, आरपीएफ, कार्मिक, हेल्थ और सेफ्टी डिपार्टमेंट के कर्मचारी उपस्थित रहे। बयानों और ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर सीआरएस रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
इसके बाद हादसे के जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई कर जवाबदेही तय की जाएगी। शनिवार को सीआरएस ने घटना स्थल का भी निरीक्षण किया था। जांच सोमवार को भी चलेगी।
तो गलती इंजीनियरिंग की...
शनिवार को रेलवे की संयुक्त जांच रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें रेलवे के इंजीनियरिंग अनुभाग की गलती सामने आई थी। रेलवे ट्रैक की फास्टनिंग नहीं हुई। सीनियर सेक्शन इंजीनियर एसएसई ने ट्रेन गुजरने के बाद कॉशन मेमो दिया। ऐसे में जिन रेलकर्मियों के बयान दर्ज हुए, उनके बीच यही चर्चा होती रही कि कहीं इंजीनियरिंग अनुभाग की गलती का खामियाजा उन्हें न भुगतना पड़े।
संयुक्त रिपोर्ट बनेगी जांच का आधार
रेलवे की ओर से तैयार की गई संयुक्त जांच रिपोर्ट सीआरएस जांच में अहम भूमिका निभाएगी। लोको पायलट त्रिभुवन नारायण, सहायक लोको पायलट राज, ट्रेन मैनेजर विश्वजीत सरकार और कीमैन से भी रिपोर्ट ली जा रही।