वहशीपन व दरिंदगी की हद पार करने वाले बाप-बेटे की करतूत से ‘वो’ (कुसुम) जिंदा लाश बन गई थी।
बुधवार को कुसुम का दर्द कुरेदा तो आंख भर आई और आंसू छलक गए। उसने बताया कि, दस साल से जिंदा रहकर भी वह हर रात मरती थी।
कुसुम ने वर्ष 2004 में उस पल को कोस रही थी जब वह ननिहाल से हाईस्कूल की परीक्षा पास कर अफसर बनने का सपना लेकर पढ़ने लखनऊ अपने माता-पिता और भाई के पास रहने आई थी।
कुसुम का अफसर बनने का सपना तो टूटा ही। साथ ही, सारी जिंदगी घुट-घुट कर जीने का गम मिला। मगर, कुसुम अब जीना चाहती है। उसका कहना है कि, अब वह परिस्थितियों से समझौता नहीं करेगी।
बेटे के साथ 10 साल तक बेटी का रेप करता रहा बाप!
हैवानियत को यादकर वह सिहर जाती है। कुसुम की मानें तो बाप-बेटे की करतूत से वह इस कदर टूट चुकी थी कि किसी से मिलने, बात करने और घर से निकलने की इच्छा ही खत्म हो गई थी। घर पर भी पाबंदी थी। किसी से मिलने व बात नहीं करने दिया जाता था।
उसने बताया कि, उसे तो यह तक पता नहीं कि ऐसे मामलों की शिकायत कहां की जाती है? थाना पुलिस का क्या काम होता है?
ब्यूटीशियन कोर्स कर रही सहेली ने उसे हिम्मत दी और राह दिखाई। उसने एक समाचार पत्र में बुधवार को मुख्यमंत्री के जनता दर्शन के बारे में बताया और उसे कालीदास मार्ग मुख्यमंत्री आवास पहुंचा दिया।