कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की शिक्षिकाओं और शिक्षणेतर कर्मचारियों को बुधवार को विभिन्न मांगों को लेकर विधानभवन के सामने धरना-प्रदर्शन करना भारी पड़ा।
रॉयल होटल चौराहे पर जमा शिक्षिकाओं को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियां बरसाईं। इस दौरान कई शिक्षिकाओं को चोटें आईं।
शिक्षिकाओं व कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ अभद्रता की व अपशब्द का प्रयोग किया। इस दौरान आठ शिक्षिकाओं व शिक्षणेतर कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया जिन्हें देर शाम छोड़ दिया गया। बाद में मुख्यमंत्री से जल्द वार्ता का आश्वासन मिलने पर शिक्षिकाएं शांत हुईं।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय शिक्षक शिक्षणेतर एसोसिएशन के बैनर तले मांगों को लेकर उग्र शिक्षिकाओं व कर्मचारियों ने विधान भवन घेरने का प्रयास किया।
वे मुख्यमंत्री से मिलने की जिद पर अड़े थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बापू भवन के सामने रॉयल होटल चौराहे पर ही रोक लिया। इससे नाराज शिक्षिकाओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सुबह 11 बजे से मुख्यमंत्री से मिलने की जिद पर अड़ी शिक्षिकाओं को रोक रही पुलिस का सब्र दोपहर सवा तीन बजे जवाब दे गया। पुलिस ने उन्हें खदेड़कर लाठियां बरसाईं और धरना स्थल लाकर बंधक बना दिया।
इस दौरान एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष श्याम द्विवेदी व पदाधिकारी विकास पांडेय, संजय चतुर्वेदी, मुकेश, पूनम गुलाटी समेत आठ को पुलिस गिरफ्तार कर हजरतगंज कोतवाली ले गई।
इस पर शिक्षिकाओं व कर्मचारियों ने सामूहिक गिरफ्तारी देने की मांग की लेकिन पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से निकलने नहीं दिया। देर शाम गिरफ्तार शिक्षकों को छोड़ दिया गया।
एसोसिएशन की पदाधिकारी भाग्यवती व पूनम का कहना है कि पुलिस ने अभद्रता करते हुए उन्हें प्रदर्शन करने से रोका। महिलाओं को अपशब्द का प्रयोग करते हुए धरना स्थल से खदेड़ा और बैनर-पोस्टर फाड़ दिए।
इस दौरान आधा दर्जन से ज्यादा शिक्षिकाओं व शिक्षणेतर कर्मचारियों को चोटें आईं। इनमें अर्चना, कुलदीप, गजराज और दिनेशचंद्र शर्मा को गंभीर चोटें आई हैं।
इन मांगों को लेकर किया प्रदर्शन
मानदेय बढ़ाया जाए और 24 घंटे की आवासीय सेवाएं समाप्त की जाएं।
कस्तूरबा विद्यालयों में पुरुषों की भर्ती पर लगी रोक हटाई जाए।
रिजवी कमेटी की सिफारिशें लागू की जाएं।