प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव में प्रस्तावक रहे सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिधर मालवीय राज्यपाल बनने के बजाय गंगा मैया की सेवा करने का रास्ता चुन सकते हैं।
केंद्रीय जल संसाधन व गंगा संरक्षण विभाग की मंत्री उमा भारती द्वारा मालवीय से इस सिलसिले में आग्रह करने के बाद इस बात की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।
माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठाने के बजाय राज्यसभा में भेजकर उन्हें महत्व देने का वैकल्पिक रास्ता तलाश सकती है।
कारण, प्रधानमंत्री ही नहीं बल्कि संघ भी मालवीय को किसी न किसी रूप में महत्व व सम्मान देना चाहता है। वैसे मालवीय ने इस बारे में पूछने पर राज्यपाल पद स्वीकार करने या न करने पर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा।
उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि गंगा की सेवा और उसकी निर्मलता ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा काम व सम्मान है।
मालवीय के नजदीकी लोगों की मानें तो पंडित मदन मोहन मालवीय के इस पौत्र के लिए गंगा की सफाई और अविरल धारा आज से नहीं काफी पहले से चिंता की बात रही है।
गंगा से उनका भावनात्मक लगाव है। वह गंगा महासभा के अध्यक्ष भी हैं। महासभा की स्थापना उनके पितामह और बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय ने ही की थी। ऐसे में इसकी संभावना काफी कम ही है कि वह उमा भारती की इच्छा की अनदेखी करें।