गौतमबुद्घ प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) और महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एमटीयू) के मर्जर हो चुका है।
अब दोबारा अस्तित्व में आए यूपीटीयू के सामने सबसे बड़ी चुनौती 910 कॉलेजों के स्टूडेंट को बेहतर सुविधाएं देने की होगी।
अभी दोनों यूनिवर्सिटी में कॉलेज बंटे हुए थे। अब पूरा भार एक पर ही होगा। सिर्फ तीन साल ही अस्तित्व में रहे नोएडा स्थित एमटीयू ने अपने यहां छात्रों को जो सुविधाएं दी वह जीबीटीयू नहीं दे पाया।
जबकि, जीबीटीयू जहां पर चलाया जा रहा था वह पुराने यूपीटीयू की तरह ही काम कर रहा था, बस नाम ही बदला था। यहां से संबद्घ इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट व फॉर्मा के कॉलेजों में वह सुविधाएं अभी नहीं मिलती जो एमटीयू दे रहा था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एमटीयू की जो अच्छी चीजें थीं उसे क्या दोबारा अस्तित्व में आए यूपीटीयू द्वारा अपनाया जाएगा, या फिर छात्रों को जीबीटीयू सरीखी सुविधाएं ही मिलेंगी।
बीती 31 अक्टूबर को दोनों यूनिवर्सिटी के मर्जर का आदेश जारी होने के दूसरे दिन एक नवंबर को जब कुलपति डॉ. आरके खांडल के हाथ में पत्र था तो उन्होंने सबसे पहले यही कहा कि वह सभी छात्रों को अच्छी से अच्छी सुविधाएं देंगे और एमटीयू अब हमारा सेकेंड कैंपस होगा।
जीबीटीयू के मुकाबले एमटीयू ने ऐसा सिस्टम बना रखा है कि यहां पर हर साल कैरी ओवर परीक्षाएं उसी वर्ष करवा ली जाती हैं।
इस यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले स्टूडेंट को अभी तक बीटेक में चारो वर्ष कैरी ओवर परीक्षा देने का मौका मिल रहा था। वहीं जीबीटीयू से संबद्घ इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को सिर्फ फर्स्ट ईयर व फोर्थ ईयर में ही कैरी ओवर देने की व्यवस्था है।
फिर एमटीयू का परीक्षा पैटर्न भी बिल्कुल अलग था यहां पर परीक्षा के प्रश्नपत्र को ए, बी, सी व डी भाग में विभाजित किया जाता था, इसमें छात्रों को मल्टीपल चॉइस, शार्ट आंसर और लांग आंसर देने होते थे।
यानी स्टूडेंट जब पूरा कोर्स पढ़ेगा तभी वह पास हो पाएगा। ऐसे परीक्षा को पास करना आसान नहीं था।
प्रतिकुलपति प्रो. दिवाकर सिंह यादव का कहना है कि अभी एमटीयू को सेकेंड कैंपस के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो भी बदलाव होंगे वह अगले शैक्षिक सत्र से होंगे।
जो भी अच्छाईयां होंगी वह स्टूडेंट के लिए लागू की जाएंगी। हम यूनिवर्सिटी को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।