पहली बार विधायक बनकर खनन जैसे महकमे के कैबिनेट मंत्री बने गायत्री प्रजापति का शुरू से भ्रष्टाचार और विवादों से नाता रहा है। अवैध खनन को लेकर उन पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं। हाईकोर्ट ने अवैध खनन को लेकर गंभीर टिप्पणी, इसकी जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए तो मामला गंभीर हो गया।
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गायत्री के भ्रष्टाचार का मामला सिर्फ अवैध खनन तक सीमित नहीं है। उन पर जमीनों पर कब्जे करने समेत कई आरोप लगे हैं। प्रजापति ने करोड़पति होकर भी बीपीएल दर्शाते हुए बेटी को कन्या विद्या धन दिलवाया।
उनके खिलाफ लोकायुक्त से पांच शिकायतें की गईं। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और बेनामी संपत्ति बनाने के भी आरोप लगे। लोकायुक्त में उनके खिलाफ जो मामले गए उनमें कुछ में शिकायत करने वाले पीछे हट गए और कुछ में पुख्ता सबूत नहीं मिल पाए।
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लगातार बढ़ता गया पॉलिटिकल ग्रॉफ
गायत्री प्रजापति 2012 में पहली चुनाव जीतने के बाद पार्टी और सरकार में ऊपर चढ़ते गए। उन पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का वरदहस्त माना जाता था। पहली बार का विधायक होने के बावजूद पहले राज्यमंत्री, फिर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और फिर कैबिनट मंत्री बने।
मुलायम सिंह ने उन्हें अति पिछड़ों के नेता के तौर पर प्रोजेक्ट किया। गायत्री के खनन मंत्री बनने के बाद अवैध खनन के तमाम आरोप लगे लेकिन किसी में कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोकायुक्त के पास फैजाबाद के रजनीश सिंह ने इसकी शिकायत की।
गरीब लड़कियों के लिए प्रदेश सरकार की कन्या विद्या धन योजना में अपनी बेटी को राशि दिलवाने वाले गायत्री ने अपना पेशा प्रॉपर्टी डीलिंग बताया था। 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अचल संपत्ति 1.21 करोड़ और चल संपत्ति 50.88 लाख बताई थी। वर्ष 2009-10 में गायत्री की सालाना आय 3.71 लाख थी।
एक विधवा ने प्रजापति पर मकान कब्जाने का आरोप लगाया तो कुछ लोगों ने सरकारी जमीन कब्जाने की शिकायत भी की। प्रजापति के खिलाफ उत्तरप्रदेश लोकायुक्त को भ्रष्टाचार की पांच शिकायतें मिलीं। इनमें से तीन शिकायतें वापस ले ली गईं या फिर उनमें जांच बंद कर दी गई। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने तो तीन लाख करोड़ रुपये के खनन घोटाले का आरोप लगाया है।
दोस्तों के नाम 300 करोड़ की संपत्ति जमा की
पहला: प्रतापगढ़ के ओमप्रकाश द्विवेदी ने लोकायुक्त से शिकायत की कि प्रजापति ने मंत्री बनने के बाद अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों के नाम पर 300 करोड़ की संपत्ति जमा की है। इसका बाजार मूल्य करीब 1000 करोड़ रुपये है। यह संपत्ति लखनऊ के मोहनलालगंज में बताई गई। बाद में द्विवेदी ने इस शिकायत को वापस ले लिया।
दूसरा मामला : सुल्तानपुर से भी आई शिकायत
सुल्तानपुर के रहने वाले अभयराज यादव ने भी लोकायुक्त से आय से अधिक संपत्ति की शिकायत की। लेकिन जब तत्कालीन जस्टिस एनके मेहरोत्रा ने यादव से इस बारे में विस्तृत जानकारी मांगी तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। तब शिकायत भी जांच बंद कर दी गई।
तीसरा मामला: बेनामी संपत्तियां बनाई
अमेठी के महेंद्र कुमार ने लोकायुक्त के पास शिकायत भेजी की गायत्री प्रजापति के रुपयों पर 50 लोगों बेनामी संपत्तियां अर्जित की हैं। तब जस्टिस एनके मेहरोत्रा ने मामले में आरोपी बनाए गए कई लोगों को समन जारी किया, लेकिन इनमें से अधिकतर ने कहा कि यह संपत्तियां उन्होंने अपने रुपयों से खरीदी हैं। महेंद्र कुमार ने इस मामले में कोई और साक्ष्य देने में असमर्थता जताई।
अवैध खनन करने वालों को संरक्षण दिया
चौथा व पांचवां : खनन में शिकायत
लोकायुक्त के पास सोनभद्र निवासी यशवंत सिंह और आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने प्रदेश में अवैध खनन के मामले में गायत्री के खिलाफ शिकायत की। इसमें बताया गया कि मंत्री गायत्री द्वारा अवैध खनन करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है। इससे हो रही आय से वह अप्रामाणिक और बेनामी संपत्तियां अर्जित कर रहे हैं।
गायत्री ने लोकायुक्त को पत्र भेजकर शिकायतें फर्जी बताईं। हालांकि लोकायुक्त ने बांदा और हमीरपुर के खनन अधिकारियों को समन जारी कर उन खनन लीज के दस्तावेज लिए जिनकी लीज मौजूदा सरकार में बढ़ाई गई है। ये लीज पर्यावरण विभाग से एनओसी लिए बगैर बढ़ाई गई थी।
नतीजा: शिकायतों पर जांच, तीन मामले वापस
लोकायुक्त ने फरवरी 2015 में प्राथमिक जांच पूरी कर गायत्री पर आय से अधिक संपत्ति के तीन मामलों को दर्ज किया। मामले में करीब छह महीने जांच की गई। लेकिन शिकायतों को सही नहीं पाया गया और मामले वापस कर लिए गए। फिर भी लोकायुक्त ने यशवंत सिंह और नूतन ठाकुर के शिकायतों पर जांच जारी रखने की बात कही।
'आईपीएस अफसर ने खोला मोर्चा तो दुराचार में फंसाया'
गायत्री के खिलाफ शिकायत करने वाली आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर के पति व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर पर जून 2015 में एक महिला ने दुराचार का आरोप लगाया। एफआईआर तक हुई। जुलाई में नूतन ठाकुर ने गायत्री प्रसाद प्रजापति, प्रदेश महिला आयोग अध्यक्ष जरीना उस्मानी व छह अन्य लोगों पर पति को फंसाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई।
उन्होंने कहा कि गायत्री प्रसाद के खिलाफ शिकायत करने पर धमकी दी गई थी। जब वे शिकायत वापस लेने के लिए नहीं मानीं तो उनके पति को दुराचार के आरोप में फंसा दिया गया।
केस गोमतीनगर थाने में दर्ज हुआ, लेकिन तीन दिन बाद ही पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस बंद कर दिया। तब नूतन ठाकुर ने सीजेएम लखनऊ के पास प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर पुलिस को जांच के लिए कहा गया।
दूसरी ओर, अमिताभ ठाकुर पर दुराचार का आरोप लगाने वाली महिला से पुलिस ने अब तक पूछताछ नहीं की है, न ही कोई और जांच कर रही है। नूतन एवं अमिताभ ने गोमतीनगर में दर्ज केस की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर बुधवार को सुनवाई होनी है।
आरोप लगते गए कद बढ़ता गया
अमेठी तहसील के परसावां में जन्मे गायत्री ने 1993 में बहुजन क्रांति दल से चुनाव लड़ा। सिर्फ 1526 वोट मिले। 1996 और 2002 भी चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 2012 के चुनाव में सपा ने अमेठी से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने कांग्रेस की अमिता सिंह को हराकर बड़ा उलटफेर किया।
राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद से आर्ट्स ग्रेजुएट गायत्री प्रजापति ने फिर मुड़कर नहीं देखा। नए तौर-तरीकों से कामकाज शुरू किया। अमेठी में पार्टी दफ्तर के बजाय होटल में पत्रकार वार्ताएं शुरू की, पीआर एजेंसी की सेवाएं लेनी प्रारंभ की।
2012 में आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगने के बावजूद 2013 में सपा सरकार में राज्यमंत्री बनाया गया, खनन जैसा महत्वपूर्ण विभाग दिया।
2013-14 में सीएम अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल का तीन दफा विस्तार हु्आ। तीनों बार गायत्री प्रजापति शपथ लेने वालों में थे। जुलाई 2013 में खनन विभाग का स्वतंत्र प्रभार मिला और जनवरी 2014 में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। लोकसभा चुनाव में हैलीकॉप्टर दिया गया। उन्हें अति पिछड़े वर्ग का चेहरा बनाने की कोशिश की।
- लखनऊ में ग्राम सभाओं की जमीन पर अवैध कब्जा करके उनकी प्लॉटिंग करके बेचा।
- गायत्री के बेटे पर अमेठी तहसील की सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप। विवाहिता के यौन शोषण में भी घिरे।
- गायत्री पर अमेठी में कुछ दिन पहले हुई संग्रह अमीन की हत्या के आरोपियों को खुला संरक्षण देने का भी आरोप लगा।
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
लखनऊ में ग्राम सभा की जमीन पर कब्जे के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगस्त 2013 में गायत्री को नोटिस जारी किया और जिला प्रशासन को अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए। नीलमथा स्थिति इस करीब 32 बीघा जमीन को बेचने के आरोप गायत्री पर लगे थे।