लखनऊ। गैस की किल्लत ने औद्योगिक पहिये रोक दिए हैं। करीब 250 फैक्टरियां पूरी तरह बंद हो गई हैं, जबकि शेष में उत्पादन क्षमता गिरकर 20% रह गई है। इस संकट का सबसे सीधा प्रहार करीब 2.5 लाख एमएसएमई इकाइयों से जुड़े करीब 10 लाख कामगारों पर पड़ा है, जिनके सामने अब छंटनी का खतरा मंडरा रहा है।
उद्यमियों का कहना है कि यदि 4-5 दिनों में आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो वे कामगारों को नमस्ते करने पर मजबूर होंगे। फिलहाल श्रमिकों को मशीनों की देखरेख जैसे कार्यों में लगाकर रोका गया है, लेकिन बिना उत्पादन के वेतन देना अब संभव नहीं दिख रहा।
उद्यमियों के अनुसार, डीजल या इलेक्ट्रिक सिस्टम अपनाना बेहद खर्चीला है, क्योंकि इसके लिए पूरी मशीनरी के बर्नर बदलने होंगे। इस विकट स्थिति को देखते हुए उद्यमियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और राहत की मांग की है।
ईरान-ईराक युद्ध में भी नहीं हुई थी ऐसी दिक्कत
Iगैस व कच्चे माल की बढ़ी कीमतों से आई दिक्कत अगर दो-चार दिन में सामान्य नहीं हुईं, तो स्थितियां गंभीर होंगी। मजबूरी में छंटनी करनी पड़ेगी। श्रमिकों को माल की छंटनी करने, मशीन को रिपेयर करने जैसे काम पर लगा रहे हैं। एक तो सरकार का सख्त नियम, ऊपर के एजेंसियों की मनमानी कामगारों को बेरोजगार करने पर तुली है। I
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दिनेश गोस्वामी, उद्यमी I
छोटे उद्यमियों की मदद करे सरकार
Iमेडिकल उपकरण, कोटिंग, कोरोगेशन इंडस्ट्री प्रभावित हुई है। अभी तो कामगारों को बुला रहे हैं लेकिन ज्यादा दिन ऐसी स्थिति नहीं रह पाएगी। सरकार को उद्योगों के लिए कोई स्कीम लानी चाहिए। कम से कम टैक्स में रिबेट मिले। या बैंक से लिए गए कर्ज में ही छूट मिले। क्योंकि, सबसे ज्यादा बुरा हाल उद्यमियों का है।I
Iविकास खन्ना, चेयरमैन, आईआईए लखनऊI
गैस संकट।
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