कपूरथला और निशातंगज में भट्टी पर पकाते खाना।
लखनऊ। करीब एक महीने से जारी व्यावसायिक गैस सिलिंडर की किल्लत और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। गैस न मिलने से परेशान होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों ने खाने की थाली और अन्य व्यंजनों के दामों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। ईंधन के वैकल्पिक साधनों लकड़ी व कोयले के महंगे होने के कारण अब चाय-समोसा बेचना भी दुकानदारों के लिए चुनौती बन गया है।
अलग अलग इलाकों में अलग अलग रेट
कपूरथला चौराहे के रेस्टोरेंट संचालक रामकुमार ने बताया कि गैस बड़ी मुश्किल से मिल रही है। सिर्फ रोटी और पराठा सेंकने में गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं। सब्जी, चावल, दाल व अन्य व्यंजन चूल्हे और भट्टियों पर बना रहे हैं। लकड़ी, कोयला व गैस की बढ़ी कीमतों के कारण 80 रुपये की भोजन की थाली 90 रुपये में कर दी है। वहीं, डालीबाग के रेस्टोरेंट संचालक ताशु ने बताया कि 120 रुपये वाली थाली 150 की कर दी है। चाय के दाम भी 20 रुपये कर दिए हैं। इसे अलावा फुटकर व्यंजनों में भी 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।
महंगे कोयले से चाय-समोसे के दाम बढ़े
निशातगंज में चाय-समोसे की दुकान चलाने वाले चंद्रप्रकाश ने बताया कि कोयला महंगा हो गया है। ग्राहक न टूटे, इसलिए दामों में मामूली बढ़ोतरी की है। चाय व समोसा 10 से 12 रुपये में किया है।
एसोसिएशन की मीटिंग के बाद तय होंगे ब्रेड के दाम
बेकरी उद्योग से जुड़े उद्यमी एसपी बत्रा ने बताया कि पैकेजिंग का सामान महंगा होने से लागत बढ़ गई है, लेकिन ब्रेड के दाम नहीं बढ़ाए हैं। पहले एक अप्रैल से कीमत बढ़ाने की बात थी, लेकिन बाजार के हाल को देखते हुए ब्रेड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन की बैठक के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
कपूरथला और निशातंगज में भट्टी पर पकाते खाना।