सूत्र बताते हैं कि इस खेल में लगे जालसाज एसजीपीजीआई से जारी होने वाली कोरोना पॉजिटिव और निगेटिव की रिपोर्ट इकट्ठा करते हैं। फिर स्कैनर के सहारे मरीज का विवरण दर्ज करते हैं। निगेटिव वाली सीरीज के आधार पर ही केस आईडी दर्ज कर देते हैं। यह काम इतनी सफाई से होता है कि रिपोर्ट देखने के बाद सामान्य व्यक्ति पकड़ ही नहीं सकता है।
जाली जांच रिपोर्ट बनाने का खेल करीब दो माह से चल रहा है। इस संबंध में छिटपुट शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन पीजीआई के कार्डियोलॉजी एमआईसीयू में भर्ती होने आए बिहार के एक मरीज ने कोविड की रिपोर्ट निगेटिव दिखाई। शक के आधार पर माइक्रोबायोलॉजी लैब से मिलान किया गया तो पता चला कि संबंधित केस आईडी और नाम के किसी व्यक्ति की जांच ही नहीं हुई है। तीमारदार से पूछताछ की गई तो उसने पूरे खेल का खुलासा किया। उसने बताया कि दो हजार रुपये लेकर बाहर एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दी है।