चौथे चरण की कई सीटों पर मुद्दों के बजाय जाति-धर्म के समीकरण ज्यादा हावी दिखे। लखनऊ की शहरी व ग्रामीण सभी नौ विधानसभा सीटों पर भाजपा और सपा सीधी लड़ाई में सामने दिखीं। पुराने लखनऊ से लेकर कॉलोनियों तक में मतदाता वोट करने निकले। पुराने लखनऊ के मुस्लिम इलाकों में तो बूथों पर शाम तक भीड़ रही। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत शहर के मुकाबले ज्यादा रहा।
मतदान में दिखे रुझान के आधार पर कहा जा सकता है कि लखनऊ की पश्चिम, बख्शी का तालाब (बीकेटी), मध्य और मोहनलालगंज सीटों पर कांटे की लड़ाई है। मोहनलालगंज व मलिहाबाद में बसपा भी ठीक लड़ी। उत्तर सीट पर सपा और भाजपा के बीच ही मुख्य मुकाबला रहा। सरोजनीनगर, कैंट व पूर्वी सीट पर भी सपा और भाजपा में मुकाबला है।
चौथे चरण की कई सीटों पर मुद्दों के बजाय जाति-धर्म के समीकरण ज्यादा हावी दिखे। लखनऊ की शहरी व ग्रामीण सभी नौ विधानसभा सीटों पर भाजपा और सपा सीधी लड़ाई में सामने दिखीं। पुराने लखनऊ से लेकर कॉलोनियों तक में मतदाता वोट करने निकले। पुराने लखनऊ के मुस्लिम इलाकों में तो बूथों पर शाम तक भीड़ रही। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत शहर के मुकाबले ज्यादा रहा।
मतदान में दिखे रुझान के आधार पर कहा जा सकता है कि लखनऊ की पश्चिम, बख्शी का तालाब (बीकेटी), मध्य और मोहनलालगंज सीटों पर कांटे की लड़ाई है। मोहनलालगंज व मलिहाबाद में बसपा भी ठीक लड़ी। उत्तर सीट पर सपा और भाजपा के बीच ही मुख्य मुकाबला रहा। सरोजनीनगर, कैंट व पूर्वी सीट पर भी सपा और भाजपा में मुकाबला है।
सोनिया के गढ़ में कहीं भाजपा-सपा तो कहीं चतुष्कोणीय मुकाबला
रायबरेली जिले की सदर, ऊंचाहार व हरचंदपुर विधानसभा सीटों पर भाजपा और सपा में सीधी टक्कर दिखी। सदर और हरचंदपुर में इस बार दलबदल का मुद्दा भी गूंजा, पर मतदान के दिन इसका असर कम ही दिखाई दिया। सदर से अदिति सिंह और हरचंदपुर सीट से राकेश सिंह वर्ष 2017 के चुुनाव में कांग्रेस से विधायक बने थे, लेकिन इस बार उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। यहां की सदर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मनीष चौहान और हरचंदपुर से सपा से कांग्रेस में आए पूर्व मंत्री सुरेंद्र विक्रम सिंह उर्फ पंजाबी सिंह ने विरोधी दलों को टक्कर दी। ऊंचाहार में पूर्व मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने इस बार हैट्रिक के लिए जोर लगाया, वहीं भाजपा के प्रत्याशी अमरपाल मौर्य ने भी पूरा दम लगाया। बछरावां विधानसभा सीट पर भाजपा-अपना दल गठबंधन के प्रत्याशी लक्ष्मीकांत रावत, सपा के श्याम सुंदर भारती, कांग्रेस प्रत्याशी सुशील पासी के बीच तगड़ा मुकाबला रहा। सरेनी में चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिला।
सीतापुर : ज्यादातर सीटों पर सीधा मुकाबला
सीतापुर की आठ सीटों पर भाजपा-सपा में सीधा मुकाबला दिखा, जबकि महमूदाबाद सीट पर त्रिकोणीय लड़ाई है। यहां बसपा प्रत्याशी मीसम अंमार रिजवी भी मुकाबले में हैं। पिछले चुनाव में सात सीटें भाजपा को मिली थीं, जबकि एक-एक सीट पर सपा-बसपा के प्रत्याशी जीते थे।
उन्नाव : कई सीटों पर कांटे की टक्कर
उन्नाव की चार सीटों पर सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला दिख रहा है। दो सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष के आसार हैं। मोहान, पुरवा और भगवंतनगर में सपा व भाजपा के बीच कांटे की लड़ाई नजर आई। बांगरमऊ में सपा, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला देखने को मिल रहा है। सफीपुर में सपा, भाजपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। सबसे कड़ा मुकाबला सदर विधानसभा सीट पर नजर आ रहा है। यहां पर भाजपा और सपा के बीच सीधी टक्कर है।
हरदोई : दो सीटों पर बसपा मुकाबले में
हरदोई की दो सीटों पर भाजपा का सीधा मुकाबला बसपा से दिखा। शेष सीटों पर भाजपा-सपा में लड़ाई रही। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में हरदोई जिले की आठ में से सात सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। संडीला में भाजपा व बसपा, तो बिलग्राम मल्लावां में भाजपा, बसपा व कांग्रेस लड़ाई में रहे। शाहाबाद में भाजपा व सपा प्रत्याशियों के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी अखिलेश पाठक के बीच त्रिकोणीय मुकाबला दिखा। शेष पांच सीटों सवायजपुर, हरदोई सदर, गोपामऊ, सांडी व बालामऊ में भाजपा और सपा मुख्य लड़ाई में रहे।
फतेहपुर : चार सीटों पर सपा-भाजपा में और दो पर त्रिकोणीय मुकाबला
फतेहपुर की चार सीटों पर भाजपा-सपा में सीधी टक्कर सामने आई। जहानाबाद विधानसभा सीट पर भाजपा, सपा व बसपा और हुसैनगंज सीट पर भाजपा, सपा व कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है। फतेहपुर, खागा सुरक्षित व अयाहशाह सीट पर भाजपा और सपा का सीधा आमना-सामना रहा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सदर सीट, हुसैनगंज, अयाहशाह व बिंदकी सीट पर भाजपा ने सपा को, जबकि खागा सीट पर भाजपा ने कांग्रेस को शिकस्त दी थी। जहानाबाद विधानसभा सीट पर भाजपा गठबंधन के अपना दल (एस) ने सपा को पराजित किया था।
बांदा : कहीं भाजपा तो कहीं सपा दिखी मजबूत, बसपा भी अच्छा लड़ी
बांदा में छह बूथों पर ईवीएम व वीवीपैट में तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायत पर कुछ देर मतदान बाधित रहा। बांदा, तिंदवारी व नरैनी सीटों पर राष्ट्रवाद के मुद्दे पर वोट पड़े। बबेरू में मतदाताओं का रुझान परिवर्तन की ओर दिखा।
खीरी-पीलीभीत : मतदाताओं में उत्साह, कई जगह सीधा मुकाबला
बरेली में लखीमपुर खीरी और पीलीभीत की कुल 12 सीटों पर हुए मतदान में 10 सीटों पर कमल और साइकिल में टक्कर दिखी। वहीं दो सीटों पर हाथी भी सधी चाल में चलता हुआ दिखाई दिया। इस चुनाव में भाजपा के सामने इन सभी सीटों पर दोबारा कमल खिलाने की चुनौती है। लखीमपुर खीरी में आठ विधानसभा सीटों में से सात पर भाजपा और सपा के बीच सीधी टक्कर दिखी। वहीं, सदर पर बसपा ने सपा और भाजपा को भी अच्छी टक्कर दी। ऐसे में इस सीट का चुनाव जहां और रोमांचक हो गया है, वहीं मतदाता भी तिकुनिया हिंसा समेत अन्य मुद्दों पर काफी मुखर दिखे। पलिया, निघासन, गोला, श्रीनगर, धौरहरा, लखीमपुर, कस्ता और मोहम्मदी सीट पर किसी पार्टी के पक्ष में लहर न होने के बावजूद मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया।
पीलीभीत में कुल कुल चार सीटें हैं। इसमें पूरनपुर, बरखेड़ा और पीलीभीत सदर पर भाजपा और सपा में सीधी टक्कर है। बीसलपुर में बसपा ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। 2017 में चारों सीटें जीत कर जिले को गढ़ बना चुकी भाजपा को किसान आंदोलन और सिख मतदाताओं ने कड़ी चुनौती दी है। पीलीभीत सदर में भाजपा के संजय गंगवार और सपा के डॉ. शैलेंद्र गंगवार में सीधी टक्कर दिखी। अधिकतर मुस्लिम मतदाता सपा की ओर दिखे।
बीसलपुर में भाजपा के विवेक वर्मा और सपा की दिव्या गंगवार के बीच की लड़ाई को बसपा के अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू ने त्रिकोणीय बना दिया। पूरनपुर में सिख बहुल बूथों पर साइकिल खूब चली। भाजपा से बगावत कर बसपा उम्मीदवार बने अशोक राजा ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया। बरखेड़ा में सपा के हेमराज वर्मा और भाजपा के स्वामी प्रवक्तानंद में सीधी टक्कर दिखी। यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार हरप्रीत सिंह चब्बा ने भी समीकरण बिगाड़े।