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एक ही नक्शे पर लखनऊ में विकास के जैसे चार मकान, एलडीए ने चिपकाया नोटिस

Thu, 09 Jul 2020 06:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

  • विकास दुबे को एलडीए ने दिया 24 घंटे का समय
  • नक्शा एलडीए में जमा करने के लिए नोटिस चस्पा
  • एक मानचित्र पर चार मकान बने होने से अटकी आगे की कार्रवाई
  • एलडीए के विहित प्राधिकारी कार्यालय और भवन मानचित्र अनुभाग से भी मांगा गया जबाव
  • विकास दुबे की पत्नी के नाम दिया गया नोटिस
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विकास दुबे के मकान पर एलडीए का नोटिस... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हत्यारोपी विकास दुबे के मकान के अवैध निर्माण की जांच के लिए अब एलडीए ने नोटिस चस्पा कर नक्शा देने के लिए कहा है। अधिशाषी अभियंता प्रवर्तन की तरफ से चस्पा नोटिस में 24 घंटे का समय नक्शा देने के दिया गया है। इसके बाद एलडीए अपनी आगे की कार्रवाई करेगा। वहीं एलडीए के अपने विहित प्राधिकारी कार्यालय और भवन मानचित्र अनुभाग से भी रिपोर्ट अधिशाषी अभियंता प्रवर्तन ने मांगी है।

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एलडीए की तरफ से जो नोटिस चस्पा किया गया है वह उसकी पत्नी रिचा दुबे केनाम है। जे-424 निवासी रिचा दुबे से कहा गया है कि पूर्व में 2002 में धर्मेंद्र ग्रोवर के नाम से एक मानचित्र स्वीकृत कराया गया। प्रवर्तन के अभियंताओं के स्थलीय निरीक्षण में मौके पर इस भूखंड पर चार मकान निर्मित पाए गए हैं। इस भूखंड पर अब एक भवन जे-424 और बाकी निर्माण जे-424ए, जे-424सी, जे-424डी निर्माण किया गया है। जिस मकान में रिचा दुबे रह रही हैं। उस मकान के स्वीकृत मानचित्र की कॉपी की आवश्यकता एलडीए को है। 

यह मानचित्र उच्च अधिकारियों के आदेश पर चल रही निर्माण की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए जरूरत एलडीए अधिकारियों ने बताई है। बृहस्पतिवार तक यह कॉपी रिचा दुबे को स्वप्रमाणित कर अधिशाषी अभियंता कार्यालय में देने के लिए कहा गया है। नोटिस चस्पा होने के बाद लेकिन कोई भी व्यक्ति एलडीए में नक्शा देने या इस संबंध में वार्ता करने के लिए नहीं पहुंचा है। अन्य भवनों के अध्यासी जरूर एलडीए जानकारी करने के लिए पहुंचे।
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पुलिस की शिकायत पर चल रही कार्रवाई
एलडीए की यह कार्रवाई पुलिस की तरफ से आई एक शिकायत पर चल रही है। इसमें कहा गया है कि जे-424 पर अवैध निर्माण की जानकारी मिली है जिसकी जांच कर रिपोर्ट भी पुलिस विभाग ने मांगी है। इसके बाद एलडीए ने जब जांच शुरू की तो मानचित्र तो स्वीकृत मिला। लेकिन, यहां स्वीकृत मानचित्र के विपरीत चार मकान वहां बने हुए मिले। ऐसे में एलडीए की कार्रवाई अटक गई।

धारा 27, 28 में नोटिस क्यों नहीं?
अधिशाषी अभियंता कमलजीत सिंह का कहना है कि संभावना है कि पिछले 18 साल में निर्माण के दौरान कोई नोटिस या अन्य कार्रवाई प्रवर्तन से हुई हो। इसके लिए ही लिखित में जबाव विहित प्राधिकारी कार्यालय से मांगा गया है। यह भी संभव है कि भूखंड के आंशिक भाग पर बाद में मानचित्र स्वीकृत करा लिया गया हो। इसकी लिखित रिपोर्ट भवन मानचित्र अनुभाग से चाहिए। इस बीच भवन स्वामी को भी अपना मानचित्र देने के लिए मौका दिया गया है। सभी जानकारी मिलने के बाद ही तय हो पाएगा कि यूपी नगर विकास अधिनियिम, 1973 की धारा 27 व 28 में अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए नोटिस किया जाए या नहीं? अगर पुराना नोटिस मिल गया तो इसकी जरूरत नहीं होगी। इसके बाद अवैध निर्माण मिलने पर सीधे ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

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